सीवान में हुई पत्रकार राजदेव की हत्या के मामले में बिहार पुलिस के साथ ही एसटीएफ गोरखपुर के दो शूटरों की तलाश में जुटी है। दो साल पहले भाजपा नेता की हत्या में भी ये दोनों शामिल रहे हैं। हाल ही में दोनों जमानत पर छूटे हैं। पुलिस ने गोरखपुर में इनके ठिकानों पर छानबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। दोनों शूटर मोनू सिंह उर्फ चवन्नी के लिए काम करते हैं।
मऊ का मोनू सिंह उर्फ चवन्नी गोरखपुर से अपने गैंग को संचालित कर रहा है। शहर में उसके गैंग के कई सदस्य सक्रिय हैं। सीवान में हुए पत्रकार हत्याकांड में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस उसके लिए काम करने वाले लोगों की तलाश में जुटी है। कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले मोनू के दो शार्प शूटर हत्या की घटना के बाद से ही फरार हैं। इनके वारदात में शामिल होने या साजिश में इनकी भूमिका होने का पुलिस को शक है। बिहार पुलिस के साथ ही यूपी एसटीएफ दोनों की तलाश जुटी है।
कोतवाली क्षेत्र में स्थित घर पर न होने के बाद उनके परिचितों के जरिए पुलिस उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। गोरखपुर के रहने वाले शूटरों ने मोनू सिंह के कहने पर ही वर्ष 2014 में सीवान के भाजपा नेता की हत्या की थी।
वारदात के बाद दोनों कोलकाता चले गए। वहां डेढ़ महीने रहने के बाद घर लौटे। बिहार पुलिस ने एसटीएफ की मदद से गोरखपुर में इन्हें गिरफ्तार किया था। दोनों शूटरों के अलावा गोरखपुर में रहने वाले छह से अधिक बदमाश भी मोनू सिंह से जुड़े हैं जिनका रिकार्ड जुटाया जा रहा है।