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संपत्ति के मामले में एसओसी के खिलाफ जांच

Wed, 04 Nov 2015 01:22 AM IST
गोरखपुर।
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संपत्ति के मामले में एसओसी के खिलाफ जांच
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अरुण चन्द
गोरखपुर। चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी (एसओसी) अनिल राय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। हैदराबाद की बेवा महिला के मामले में एक बार शासन की सख्ती झेलने के बाद अब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति समेत कई मामलों में जांच शुरू हो गई है। उनपर एक ही जिले में डेढ़ दशक से अधिक समय से जमे रहने और चकबंदी न्यायालयों के फर्जी आदेश तैयार कर किसानों की जमीन हड़पने वालों को शह देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिला प्रशासन से इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।  
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष सतीश ओझा समेत कई किसान नेताओं की शिकायत पर प्रमुख सचिव राजस्व एवं चकबंदी आयुक्त ने डीएम रंजन कुमार को मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। डीएम ने जांच की जिम्मेदारी एडीएम(प्रशासन) और उप निदेशक चकबंदी (डीडीसी) सुरेश चंद्र तिवारी को दी है। बताया जा रहा है कि अगर सख्ती से जांच हुई तो एसओसी मुश्किल में पड़ सकते हैं।   
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आरोप लगाया गया है कि शहर में एक आलीशान मकान के अलावा उनके पास मंडल में कई स्थानों पर परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर जमीन और मकान हैं। यही नहीं सहायक चकबंदी अधिकारी (एसीओ), चकबंदी अधिकारी (सीओ) और फिर एसओसी के तौर पर वह डेढ़ दशक से अधिक समय से इसी जिले में बने हुए हैं। यूनियन ने उनपर फर्जी अदालत चलाकर किसानों की जमीन हड़पने वालों को शह देने का भी आरोप लगाया है। यही नहीं चकबंदी न्यायालय का फर्जी आदेश तैयार कर हैदराबाद की बेवा कमर वलिउल्लाह की जंगल रामगढ़ उर्फ चौरी की 5.17 एकड़ जमीन और जंगल विश्रामपुर की सूखा देवी की साढ़े तीन एकड़ जमीन हड़पने वाले अलहदादपुर के तारिक जफर की भी मदद करने की शिकायत हुई है। कहा गया है कि पूर्व प्रमुख सचिव राजस्व, पूर्व राजस्व परिषद सदस्य अनिल कुमार गुप्ता, कमिश्नर और डीएम के निर्देश के बाद भी उन्होंने इन दोनों गरीबों के मामले को लटकाए रखा।   
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कोट
मामले की जांच शुरू कर दी गई है। कुछ बिंदुओं पर तो जांच पूरी भी कर ली गई है। पंचायत चुनाव में व्यस्तता के नाते कुछ बिंदु बाकी रह गए हैं, जल्द ही इसे भी पूरा करने के साथ एसओसी से उनका पक्ष भी लिया जाएगा और फिर जांच रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को भेज दी जाएगी।
- सुरेश चंद्र तिवारी, एडीएम (प्रशासन) और डीडीसी।
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