गोरखपुर। गोंडा पुलिस ने रविवार की दोपहर लालबत्ती लगी गाड़ी में लखनऊ से आ रहे गोरखपुर के दो युवकों को गिरफ्तार किया। तलाशी में इनके पास से 1.80 लाख रुपये और बच्चों के एडमीशन से संबंधित कागजात मिले हैं। आरोपियों पर जालसाजी का केस दर्ज कर गोंडा की नवाबगंज पुलिस पूछताछ कर रही है।
ब्लाक प्रमुख चुनाव को लेकर गोंडा पुलिस रविवार की दोपहर हाईवे पर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। लखनऊ की तरफ से आ रही लालबत्ती लगी फार्च्यूनर को रोक कर तलाशी ली गई तो उसमें सवार दो युवकों के पास से 1.80 लाख रुपये और बच्चों के एडमीशन से संबंधित कागजात, फोटो मिले। पूछताछ में युवकों की पहचान राजघाट, बसंतपुर के कासिफ जमाल और अलहदादपुर के मोहम्मद असद के रूप में हुई।
दोनों ने बताया कि वह लखनऊ से गोरखपुर जा रहे हैं। खुद को मंत्री का रिश्तेदार बताकर कासिफ ने पुलिसकर्मियों पर रौब दिखाने का प्रयास किया। तो दूसरे ने खुद को गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पति बताया। तस्दीक करने पर मामला झूठा निकला। एसपी के निर्देश पर नवाबगंज कोतवाली पुलिस ने दोनों के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज कर रुपये और कागजात कब्जे में ले लिया।
एसपी गोंडा प्रदीप कुमार ने बताया कि ऐहतियात के तौर पर लाल, नीली बत्ती लगी गाड़ियों की चेकिंग कराई जा रही थी। पकड़े गए युवकों का संबंध एडमीशन कराने वाले रैकेट से जुड़ा होने का संदेह है। मामले की छानबीन चल रही है।
इस बारे में जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव का कहना है कि वह पति के साथ निजी कार्य से एक प्राइवेट गाड़ी लेकर गोंडा गई थीं। वहां एक रेस्टोरेंट में वह जलपान करने लगीं और ड्राइवर को गाड़ी में पेट्रोल भराने भेज दिया। जहां पुलिस ने रोककर पूछताछ की, जब उन्हें पता चला कि गाड़ी मेरी है तो द्वेशवश गाड़ी सीज कर दी। चूंकि गोरखपुर में एसपी रहते समय प्रदीप कुमार की मेरे पति मनुरोजन यादव से अदावत थी। गाड़ी में शहर के डॉक्टर कफील खान के भाई भी मौजूद थे।