मेडिकल कॉलेज में तीमारदार की हुई थी पिटाई।
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सोमवार को मेडिकल कॉलेज में हुए बवाल की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री राधेश्याम सिंह के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आए कॉलेज प्रशासन ने कमेटी गठित करते हुए एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
मालूम हो कि सोमवार को ट्रॉमा सेंटर में कुशीनगर, चाप गांव की खुशबुनिशां के तीमारदारों को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा था। मारपीट में बीमार मरीज भी बेहोश होकर फर्श पर गिर गई थीं। कार्रवाई की मांग को लेकर सड़क जाम कर रहे तीमारदारों की तहरीर तक पुलिस ने नहीं ली थी। पहले तो कॉलेज प्रशासन मामले की लीपापोती में जुटा रहा, मगर मामला उजागर होने के बाद अब कॉलेज प्रशासन ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच का आदेश दे दिया है। मंगलवार को प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र ने सभी विभागाध्यक्षों से बात की। इसके बाद कमेटी बनाने का फैसला किया गया। इसमें जनरल सर्जरी डॉ. योगेश पाल, आर्थो सर्जरी के डॉ. अशोक यादव और मेडिसिन के डॉ. महिम मित्तल के साथ ही कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर डॉ. आरके चतुर्वेदी को शामिल किया गया है।
इंसेफेलाइटिस वार्ड में लापरवाही की जांच शुरू
मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में मासूम की मौत की जांच शुरू हो गई। घरवालों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। मालूम हो कि शनिवार की देर रात को इंसेफेलाइटिस वार्ड 100 बेड में तिवारीपुर के अश्वनी के चार साल के बेटे शिवांश की मौत हो गई थी। घरवालों ने आरोप लगाया था बच्चा तड़पता रहा मगर उसे देखने के लिए एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। उस समय वार्ड में दो जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी थी। करीब तीन घंटे बाद जब दोनों डॉक्टर लौटे तब तक शिवांश की हालत बिगड़ चुकी थी, और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। वार्ड में तैनात दोनों जूनियर डॉक्टरों के अलावा नर्स और गार्ड से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। वार्ड 100 बेड के प्रभारी डॉ. केएच खान ने बताया कि जांच चल रही है। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जूनियर डॉक्टरों को दी नसीहत
सोमवार की घटना से बिगड़ी मेडिकल कॉलेज की छवि को सुधारने के लिए अब सीनियर डॉक्टर आगे आए हैं। कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठक कर उन्हें नसीहत दी गई है। सीनियर डॉक्टरों ने कहा है कि किसी भी दशा में मारपीट की स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि कोई दिक्कत आए तो इसकी सूचना पुलिस को दें, वे कार्रवाई करेंगे। मारपीट से डॉक्टर की छवि धूमिल हो रही है।
दहशत से मरीज अस्पताल छोड़कर भागे
सोमवार को जूनियर डॉक्टरों के उग्र रवैए के बाद कई तीमारदार अपने मरीज को डिस्चार्ज कराकर अस्पताल छोड़ दिए हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन इस बात को मानने को तैयार नहीं है। मगर इमरजेंसी के खाली बेड इसकी गवाही दे रहे हैं। रोजाना जगह न मिल पाने वाले मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के आधे से ज्यादा बेड खाली रहें। वहीं कई वार्ड में तीमारदार सहमे हुए हैं। जूनियर डॉक्टरों से अपनी बात कह पाने में भी लोगों को डर लग रहा है। सर्जरी वार्ड के एक मरीज ने तो सीनियर डॉक्टर से अपने खौफ की दास्तां बयां कर दी।