चुनाव तक जेल से बंदियों को पेशी पर नहीं जाना होगा। फोर्स की कमी को लेकर एसएसपी ने जिला जज को पत्र लिखा तो उन्होंने एक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी जेल पर लगाकर वहीं पेशी की व्यवस्था करा दी।
मंडलीय कारागार से कोर्ट में पेशी कराने के लिए रोजाना 50 से ज्यादा सिपाहियों की ड्यूटी लगती थी। मगर चुनाव में ड्यूटी लगने के बाद जिले में इतने सिपाही बचे ही नहीं कि बंदियों को कोर्ट ले जाने के लिए उनकी ड्यूटी लगाई जा सके। पेशी पर आने के दौरान कैदी के फरार होने की घटना के बाद से ही उनकी सुरक्षा और बढ़ा दी गई थी। अब चुनाव में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगने के बाद केस प्रभावित न होने पाए, इसे देखते हुए एसएसपी ने जिला जज को पत्र लिखकर समस्या बताई। एसएसपी के पत्र के बाद से जिला जज ने एक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी तय कर दी, जो जेल पहुंचकर बंदियों के केस की सुनवाई कर रहे हैं। फोर्स की कमी के वजह से सिर्फ कोर्ट का ही नहीं बल्कि जिले के थानों का भी काम पूरी तरह से प्रभावित हो गया है।