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कहीं बदइंतजामी तो नहीं ले रही जान

Thu, 20 Oct 2016 01:44 AM IST
बृजेश कुमार गुप्ता, अमर उजाला, गोरखपुर।
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मेड‌िकल कालेज
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देश में डेंगू को लेकर हाय-तौबा मची है। शासन से लेकर प्रशासन तक अलर्ट जारी है। लेकिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज इससे बेखबर है। यहां के डेंगू वार्ड में दूसरे रोगों के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। यहीं नहीं डेंगू मरीज दूसरे वार्ड में भी भर्ती किए जा रहे हैं। आम मरीजों के साथ भर्ती होने से संक्रमण का खतरा होता है। यह हाल तब है जब मेडिकल कॉलेज में डेंगू से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है।
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डेंगू मरीजों को आम मरीजों से अलग रखा जाना बेहतर माना जाता है। इतना ही नहीं इन मरीजों को मच्छरों से बचाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि इनके संपर्क में आने वाले मच्छर इस रोग के वाहक हो जाते हैं। यही वजह है कि अलग वार्ड के साथ ही मच्छरदानी का प्रयोग भी किया जाता है। मगर इन सावधानियों को दरकिनार कर मेडिकल कॉलेज में मरीजों को आम मरीजों के बीच में ही रखा जा रहा है। अभी भी दो डेंगू मरीज यहां भर्ती हैं, जिन्हें सामान्य मरीजों के साथ ही रखा गया है। एक मरीज वार्ड 12 में तो दूसरा वार्ड नौ में भर्ती है। मेडिकल कॉलेज में 11 जुलाई से 7 अक्टूबर तक 17 मरीज आ चुके हैं। इसमें से तीन मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी अस्पताल में इसके इलाज को लेकर कोई सतर्कता नहीं बरती गई। 
अफसर के दौरे में बनाए गए थे वार्ड डेंगू को लेकर बीते दिनों कमिश्नर और डीएम के दौरे के समय अस्पताल प्रशासन ने एपीडेमिक वार्ड को डेंगू वार्ड बना दिया था। तब अफसरों को भी लगा कि यहां व्यवस्था दुरुस्त है, मगर उसके बाद वार्ड में अन्य मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया गया। फिर अन्य वार्ड में भी डेंगू मरीज भर्ती होने लगे।
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53 को स्वस्थ कर चुका है जिला अस्पताल  इलाज के तरीके की बात की जाए तो जिला अस्पताल में डेंगू का अलग वार्ड है। यहां मरीजों को मच्छरदानी में रखा जाता है और आराम कराने के साथ ही सिर्फ पैरासिटामॉल दिया जा रहा है। यहां अब तक 53 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं, जो जिला अस्पताल से स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। वहीं चिकनगुनिया के भी दो मरीजों का उपचार जिला अस्पताल में हुआ है। यहां आने वाले किसी भी मरीज को रेफर करने या प्लेटलेट्स भी नहीं चढ़ाना पड़ा। अगर दोनों अस्पतालों की तुलना किया जाए तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती भी कम हुए और मौत भी ज्यादा हुई। यानी कहीं न कही व्यवस्था की लापरवाही साफ दिख रही है।
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मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं है, ऐसे में वार्ड को खाली नहीं रखा जा सकता है। डेंगू मरीजों के उपचार में लापरवाही नहीं होती है।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज
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