गोरखपुर। फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर झूठा बयान देने वाले डॉक्टर समेत तीन गवाहों पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गवाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया है। वहीं फर्जी मुकदमे में चार आरोपियों को कोर्ट निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया है।
गुलरिहा थाना क्षेत्र के अराजी चिलबिलवा निवासी दुर्गविजय सिंह ने कोर्ट में खुद पर जानलेवा हमला करने और लूट की बात कहते हुए मुकदमा दर्ज करने की अर्जी दी थी। जिस पर कोर्ट ने शाहपुर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना आदेश दिया था।
वादी की तहरीर पर गांव के ही लाल साहब सिंह, अश्वनी कुमार इंद्रजीत सिंह तथा पिपराइच के अतरौलिया निवासी महेंद्र सिंह पर मुकदमा दर्ज किया था। वादी ने आरोप लगाया था कि 26 मई 2004 को शाहपुर थाना क्षेत्र के एचएन सिंह चौराहा के पास चर्च के करीब उसे अभियुक्तों ने गोली मारकर 730 रुपये लूट लिए थे।
दौरान विवेचना पुलिस ने चार्जशीट लगाया। हालांकि विवेचक ने वादी की माता से पूछताछ में घटना का होना नहीं पाया था। इस मामले में जिला अस्पताल में तैनात रहे डॉ. एसके श्रीवास्तव ने मेडिकोलीगल बनाया था जिसमें उन्होंने गोली लगने की पुष्टि की थी।
कोर्ट में उन्होंने गोली लगने से इंकार कर दिया। कोर्ट में वादी व उसके तीन गवाहों का बयान झूठा निकाला। मुल्जिमों के अधिवक्ता श्यामजी त्रिपाठी और विद्या सागर दुबे ने कहा कि वादी दुर्गविजय सिंह ने उनके पिता की हत्या की थी जिसका मुकदमा चल रहा है इसी मुकदमे में सुलह करने का दबाव बना रहे थे।
नहीं मानने पर फर्जी मुकदमे में फंसा दिया। कोर्ट ने फर्जी गवाही देने वाले डॉक्टर, वादी और उसके गवाहों पर मुकदमा दर्ज करते हुए नोटिस जारी कर दिया है।