लॉटरी निकलने का झांसा देकर ठगी करने वाले नाइजीरियन युवक और उसके साथी को क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली में गिरफ्तार किया। गोरखपुर के रहने वाले युवक की मदद से वह पूरे देश में वह धंधा चला रहा था। ट्रांजिट रिमांड पर गोरखपुर लाने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम आरोपियों से पूछताछ कर रही है। सोमवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
रविवार की दोपहर पुलिस लाइंस में प्रेस वार्ता कर एसएसपी रामलाल वर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर को एसबीआई की टेकवार शाखा के प्रबंधक ने खजनी थाने में अपने यहां फर्जी दस्तावेज पर पांच अकाउंट खोले जाने और इसमें 23 लाख रुपये की निकासी होने की जानकारी दी। मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने खाता खुलवाने वाले युवकों के साथ ही उनके सहयोगी अजित सिंह को गिरफ्तार किया। सर्विलांस की मदद से छानबीन करने पर गैंग लीडर गुलरिहा के भटहट निवासी प्रशांत सिंह का लोकेशन लखनऊ के गोमतीनगर में मिला, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में पता चला कि वह दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में रहने वाले नाइजीरियन युवक के लिए काम करता है। प्रशांत से मिली सूचना के आधार पर गोरखपुर क्राइम ब्रांच की टीम दिल्ली पहुंची। पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। उनकी मदद से नाइजीरिया के उमहिया निवासी विक्टर चिनोमोसो उर्फ वोयेला को 16 सितंबर को जनकपुरी इस्ट मेट्रो स्टेशन के पास गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर किराए के कमरे की तलाशी लेकर लैपटॉप, मोबाइल, इंटरनेट मोडम, 51 रिलायंस के सिमकार्ड, चार नाइजीरियन सिमकार्ड, चार बैक का चेकबुक, 11 बैंक पासबुक और 12 हजार रुपये बरामद किए।
प्रशांत के पास से तीन हजार रुपये, मोबाइल और पासबुक मिला। एसएसपी रामलाल वर्मा ने प्रशांत पर जालसाजी के 10 मामले पहले से दर्ज हैं। नाइजीरियन युवक फर्जी नाम, पते पर बैंक में एकाउंट खुलवाकर फोन से लोगों को लॉटरी निकलने का झांसा देकर ठगी करता था। 2012 से दिल्ली में स्टूडेंट वीजा पर रहता था। उसके बारे में अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।
गोवा में केस दर्ज होने पर सक्रिय हुई थी क्राइम ब्रांच
जालसाज प्रशांत की मदद से विक्टर उत्तर प्रदेश के अलावा गोवा, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई में सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुका है। कब्जे से मिले पासबुक के जरिए डिटेल लेकर पुलिस जानकारी जुटाने में लगी है। 20 दिन पहले विक्टर के नेटवर्क से जुडे़ गोरखपुर के युवकों पर खजनी में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद एसएसपी ने जांच क्राइम ब्रांच को दी थी। छानबीन में गोवा में केस दर्ज होने की जानकारी होने के बाद क्राइम ब्रांच सक्रिय हुई थी।
प्रशांत सिंह सात साल पहले शहर में ऑकस्टर बीपीओ के नाम से डाटा फीडिंग की संस्था चलाता था। सैकड़ों लोगों से लाखों की जालसाजी करने के बाद वह शहर छोड़कर वर्ष 2010 में चला गया। जालसाजी के मामले में दो साल पहले गुवाहाटी पुलिस ने जेल भेजा था। जेल में प्रशांत की मुलाकात नाइजीरियन युवक फ्लिप से हुई थी। नजदीकी बढ़ने पर उसने विक्टर के बारे में जानकारी देने के साथ ही उसका पता और मोबाइल नंबर दिया था। पिछले 14 महीने से प्रशांत फर्जी नाम, पते पर लोगों से बैंक में अकाउंट खुलवाकर बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराता था। जांच के बाद उसे एक अकाउंट खुलवाने पर उसे विक्टर 10 हजार रुपये देता था, जिसके नाम से खाता खुलता था उसे अजीत के जरिए 1500 रुपये मिलते थे।
विक्टर गूगल से भारी संख्या में नंबर उठाने के बाद वह उन पर लाखों की लॉटरी लगने का एसएमएस भेजता था। जाल में फंसने वाले लोगों को रकम देने के लिए वह टैक्स के रूप में रुपये खाते में जमा करने की डिमांड करता था। फर्जी नाम से खोले गए खाते में रुपये जमा कराने के बाद एटीएम के जरिए निकाल लेता था। भारत में विक्टर स्टूडेंट वीजा पर वर्ष 2012 में आया था। चेन्नई से वह पैंट और शर्ट खरीदकर नाइजीरिया भेजता था। एसएसपी रामलाल वर्मा ने बताया कि नेटवर्क के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। एलआईयू के जरिए विक्टर के वीजा की जांच कराई जाएगी।