गोरखपुर। मुलाहिजा बैरक मेें जाते ही डॉ. कफील खान मायूस हो गये। मंगलवार को दिन भर वह बैरक में तन्हा बैठे रहे। दूसरे दिन भी उनसे मुलाकात करने कोई भी जेल नहीं पहुंचा। रात में जो बंदी उनके साथ थे, उन्हें उनकी बैरकों में भेज दिया गया। ऐसे में डॉ. कफील किसी से बात नहीं कर पाए। सुबह नाश्ता और दोपहर को भोजन करने के बाद वह अपनी बैरक में करवटें बदलते रहे।
वहीं डॉ. पूर्णिमा और डॉ. राजीव मिश्रा से मिलने उनका बेटा पूरक अपने चाचा पार्थसारथी के साथ जेल पहुंचे। उनके साथ बॉल्टी, मग, फल, कपड़े और अन्य सामान भी थे। सूत्रों का कहना है कि नेहरू बैरक में तन्हा होने का दर्द डॉ. राजीव के चेहरे पर साफ झलक रहा था। बेटे और भाई से करीब 50 मिनट की मुलाकात में उन्होंने उनसे अकेले गुजारी रात का दर्द साझा किया। साथ ही जमानत और अन्य कई पहलुओं पर भी चर्चा की। पांच दिन से जेल में बंद डॉक्टर दंपती से उनके घरवालों की यह चौथी मुलाकात थी। शनिवार को जेल प्रशासन ने डॉक्टर दंपती की आपस में मुलाकात भी कराई थी। जेल में डॉक्टर दंपती की रोजाना मुलाकात हो रही है, जो नियम विरुद्ध है।
दूसरी तरफ जेल में बंद तीनों डॉक्टरों पर शासन का पहरा बढ़ गया है। जेल में होने वाली हर गतिविधियों पर प्रमुख सचिव नजर रख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर दंपती और डॉ. कफील के बारे में शासन स्तर से कई बार पूछताछ हो चुकी है। प्रतिदिन मुलाकात, दिनचर्या और भोजन की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। डीएम को भी जेल के अंदर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। जेल में तीनों डॉक्टर हाई प्रोफाइल बंदी बन गए है।
कोट
डॉ. कफील को मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। उनसे किसी ने मुलाकात नहीं की है। वहीं डॉक्टर दंपती से उनके घर के दो लोगों ने मुलाकात की है।
- डॉ. रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक