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हुक्मरान फैसले नहीं ले सके, बर्बाद हो गई 31 बीघा फसल

Fri, 19 May 2017 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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खेत में पड़ी गेहूं की सड़ी फसल। - फोटो : Amar Ujala
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एक तरफ देश के कई कोनों में हर साल भुखमरी से तमाम लोगों की जान चली जा रही है वहीं प्रशासनिक मशीनरी के ढुलमुल रवैये से सदर तहसील की ग्राम पंचायत जमुआर में 31 बीघे खेत में पक कर तैयार खड़ी गेहूं की पूरी फसल बर्बाद हो गई। जमीन पर मालिकाना हक जता रहे दो पक्षों में से एक ने पुलिस से लेकर प्रशासन तक के अफसरों से मामले में कार्रवाई की दुहाई दी, मगर तहसील प्रशासन पुलिस से और पुलिस तहसील प्रशासन से रिपोर्ट मांगती रही। अब आला अफसर, मातहतों की इस लापरवाही पर स्यापा कर जांच का आश्वासन दे रहे हैं। वह भी यह मान रहे हैं कि जमीन किसकी है यह फैसला भविष्य में होता रहता, मगर जिम्मेदारों ने संजीदगी दिखाई होती तो मिट्टी में मिल चुकी फसल को तो बचाया ही जा सकता था।
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वहीं खुद को जमीन का असली मालिक बता रहे एक पक्ष ने को जब स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिली तो उसने रजिस्टर्ड डाक से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव राहुल भटनागर से मामले की शिकायत की है। जमुआर के बगल के गांव मोहम्मदपुर माफी के राधेश्याम, सुरेंद्र, रवींद्र, श्यामचरण, भानमति, देशमित्र और विश्वामित्र का दावा है कि नदी किनारे की 36 बीघे की इस जमीन पर उनका मालिकाना हक है। दो अप्रैल 2017 को जब वे खेतों में फसल की कटाई करा रहे थे तो चिलुआताल थाने की पुलिस ने आकर कटाई रोक  दी। तब तक पांच बीघे की फसल कट चुकी थी, गेहूं को ट्रॉली पर रखवा दिया गया था। पुलिस उसे भी उठा ले गई और मजनू चौराहा स्थित पुलिस चौकी पर उसे रखवा दिया। बताया कि तब से अभी तक उन्होंने इसकी शिकायत थाने से लेकर तहसील प्रशासन, समाधान दिवस और तहसील दिवस में भी की। मगर सब एक-दूसरे के पास दौड़ाते रहे। किसी ने फसल तक को कटवाकर उसे सुरक्षित करना मुनासिब नहीं समझा।

उन्होंने कहा कि  10 फरवरी 2009 को सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट ने उनके पक्ष में फै सला सुनाते हुए सरकार और विपक्ष को उनके कब्जे में दखल नहीं देने की हिदायत दी थी। उन्होंने कोर्ट के इस आदेश की कॉपी पुलिस और प्रशासन के अफसरों को भी दे रखी है, जबकि विपक्षी शंभू आदि कोई साक्ष्य नहीं दे सके।
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अगर ऐसा है तो धारा 145 के तहत फसल को कब्जे में लेकर उससे होने वाली आय को कोषागार में जमा कराया जाना चाहिए था। मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी।
- राजीव रौतेला, डीएम

मामला मेरे संज्ञान में है। जमीन को लेकर पूर्व में कई बार विवाद हो चुके हैं। कानून व्यवस्था न खराब हो इसलिए मौके पर पहुंचकर पुलिस ने कार्रवाई की थी। विवाद में फसल न खराब हो, इसके लिए तहसील प्रशासन को लेखपालों से जांच कराकर कार्रवाई के लिए कहा था।
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- चारु निगम, सीओ गोरखनाथ 
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