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हाईकोर्ट के आदेश पर फिर होगी दुष्कर्म की तफ्तीश

Wed, 06 Jun 2018 12:07 AM IST
siddharthnagar
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सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र की एक दलित किशोरी ने विधायक के कार्यालय में दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस की कार्रवाई से नाउम्मीद होकर हाईकोर्ट में गुहार लगाई। जिस पर अदालत ने उसके कलमबंद बयान लेकर एसपी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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यह घटना 6 दिसंबर 2017 की है। पीड़िता ने पुलिस में 6 फरवरी 2018 को तहरीर दी थी। जिसमें कहा गया था कि वह जिले में स्थित ननिहाल में खेत पर काम रही थी। इस दौरान गोलू और सोनू मिले। उन्होंने कहा कि चलो तुम्हारी अम्मा की तबियत खराब है। अस्पताल में भर्ती हैं। फिर दोनों मोटरसाइकिल से बस अड्डे ले गए। वहां निराला व उसकी पत्नी, बाठे व उसकी पत्नी, मोनू व उसकी मां ने सोनू को तीन हजार रुपये दिए और धमकाकर बस पर बैठा दिया।

सोनू मुझे बस से आनंद विहार नई दिल्ली ले गया। दो-तीन दिन हम बस अड्डे पर भटकते रहे। इसके बाद निराला ने सोनू को फोन कर वापस आने को कहा। निराला के दामाद ने गाजियाबाद बुलाकर दो हजार रुपये दिए और ट्रेन में बैठा दिया। निराला ने हम दोनों को अमर सिंह चौधरी कार्यालय में बुलाया। सोनू को शराब पिलाकर सुलाने के बाद निराला ने मेरे साथ दुष्कर्म किया। उसके दूसरे दिन बाठे ने भी दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
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इस मामले में शोहरतगढ़ पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। पीड़िता का आरोप है कि बयान देने के बाद भी पुलिस ने असली आरोपियों के नाम गायब कर दिए, जिससे वह खुलेआम घूम कर धमकी दे रहे थे। जिससे उसने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। वहां उसके कलमबंद बयान लेने के बाद एसपी को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि एसपी डॉ धर्मबीर सिंह का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। हाईकोर्ट का आदेश आने पर जांच कर रिपोर्ट भेजी जाएगी।

विपक्षियों की है साजिश
शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह ने कहा कि यह विपक्षियों की बदनाम करने की साजिश है। मेरा एक कार्यालय है। वह भी बरामदे में है। वहां पर कोई रुक नहीं सकता है। ऐसे में जो भी आरोप लगाए हैं वह पूरी तरह से निराधार है। मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।

क्या है कलमबंद बयान
एडवोकेट संजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कलमबंद बयान मुख्य साक्ष्य होता है। उसी बयान के आधार पर कोर्ट अपना फैसला सुनाती है। इसके बाद भी अगर पुलिस कलमबंद बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं करती है तो यह माना जाएगा कि पुलिस ने पूरी तरह से गलत किया है। कलमबंद बयान के आधार पर हाल में ही में कई लोगों पर न्यायालय ने कार्रवाई की है, जो इस वक्त जेल में है।
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