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करंट से युवक की मौत, हाईवे जाम कर हंगामा

Tue, 26 Jun 2018 01:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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यमकेश्वर ब्लॉक के घारकोट के पास हाईटेंशन लाइन पर चिपका कर्मी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। खोराबार थानाक्षेत्र के रुद्रापुर गांव में स्टे वायर के जरिए खेत के पानी में प्रवाहित करंट की चपेट में आने से युवक की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर जुटे गांववालों ने बिजली निगम के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। हाईवे (गोरखपुर-कुशीनगर मार्ग) पर शव रखकर जाम लगा दिया गया। अधिकारियों ने मृत युवक के परिवार को आर्थिक मुआवजा और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, तब लोग शांत हुए।
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रुद्रापुर गांव के मोहन गौड़ के पुत्र रामा (18) सोमवार की सुबह खेत में गए थे। खेत में स्थित खंबे को सहारा देने के लिए लगा स्टे तार पानी से स्पर्श कर गया। रामा ने जैसे ही पानी को हाथ लगाए, वह करंट की चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसकी सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। गुस्साए ग्रामीणों ने बिजली महकमे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शव को हाईवे पर रख जाम लगा दिया। मामले की जानकारी होने पर सपा नेता व जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र सिंह भी पहुंचे।

उसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की गई। करीब डेढ़ घंटे बाद एडीएम प्रभुनाथ, एसपी सिटी विनय कुमार सिंह, अधिशाषी अभियंता हवलदार रावत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को बिजली निगम की तरफ से आर्थिक मुआवजा और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया। उसके बाद लोग हटे। करीब दो घंटे बाद आवागमन बहाल हो सका। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया।

महकमे की लापरवाही सामने आई

बिजली के खंभों के भार को रोकने के लिए झुकाव के दूसरे तरफ स्टे वायर से उसे बांधा जाता है। इसके चारों तरफ छह फीट कर इंसुलेटर लगाया जाता है, जिससे स्टे वायर में करंट न उतर सके। घटनास्थल पर स्टे वायर के पास इंसुलेटर नहीं लगाया था। लगाया होता तो करंट नहीं उतरता।

चार साल हो गए, नहीं मिला मुआवजा

जगदीशपुर । खोराबार के जगदीशपुर गांव में धान की रोपाई के लिए पानी चलाते समय तीन जुलाई 2014 को जगदीशपुर के देवेंद्र कुमार सिंह उर्फ नेता की करंट लगने से मौत हो गई थी। गुस्साए ग्रामीणों ने उपकेंद्र के सामने शव रखकर हाईवे जाम किया था। उस वक्त भी मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने एक लाख रुपये का मुआवजा देने के लिए कहा था। चार साल बाद भी प्रभावित परिवार को मुआवजे की राशि नहीं मिली।
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