ऊरूवा बाजार (गोरखपुर)। बिजली निगम की लापरवाही ने एक बुजुर्ग की जान ले ली। खराब मानक का इंसुलेटर पंचर होने से हाईटेंशन तार टूटकर नीचे गिर गया। सुबह सैर के लिए निकले भालचंद्र सिंह की तार के चपेट में आने से मौत हो गई। निगम के अधिकारी इसे तकनीकी खामी से हुआ हादसा बताकर मुआवजे देने की बात कह रहे हैं। अधिकारियों की नजर में निगम के किसी कर्मचारी-अधिकारी की गलती सामने नहीं आई।
उरूवा बाजार के दुघरा गांव निवासी भालचंद्र मंगलवार की सुबह पांच बजे करीब घर से सैर करने निकले थे। खेत की तरफ जाते वक्त बीच रास्ते में ही हाईटेंशन तार की चपेट में आ गए। सूचना मिलने पर लाइनमैन और पुलिस भी मौके पर पहुंची। घरवालों ने आरोप लगाया कि आए दिन तारों के आपस में सटने से चिनगारी निकलती रहती है। निगम को लगातार इसकी सूचना देने पर भीसही नहीं किया गया। वहीं जेई सीबी चौरसिया ने बताया कि सुबह पांच बजे करीब अचानक से इंसुलेटर पंचर हो गया और हाईटेंशन तार टूट कर नीचे गिर गया था। अंधेरा होने की वजह से भालचंद्र को तार नहीं दिखा। जबकि अधीक्षण अभियंता रणविजय सिंह ने बताया कि मृतक को विद्युत सुरक्षा की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
कमीशन की भेंट तो नहीं चढ़े भालचंद्र
कुछ महीने पहले तत्कालीन मुख्य अभियंता ने उपकरणों के मानक में गड़बड़ी पाए जाने पर सप्लाई करने वाली फर्म को नोटिस भेजा था। ऐसे में सवाल उठने लगा कि कहीं खराब मानक के इंसुलेटर तो नहीं लगे थे। विशेषज्ञों की मानें तो उच्च मानक के इंसुलेटर 15 से 20 साल तक नहीं खराब होते।
परीक्षण किया होता तो नहीं होती घटना
गर्मी शुरू होने के साथ ही खंभे, तार, ट्रांसफार्मर का परीक्षण किया जाता है। कहा जा रहा है कि अगर समय से हाईटेंशन तारों के अलावा खंभों पर लगने वाले इंसुलेटर की जांच की जाती तो संभव था कि भालचंद्र की जान नहीं जाती।
नहीं मिल सका मुआवजा
6 मई की रात मुलहरिया थानाक्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर गांव में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से बाइक सवार दो युवक रियाजुद्दीन और मोहन की मौत हो गई थी। उस समय भी विभाग ने कहा था कि विद्युत सुरक्षा की रिपोर्ट के आधार पर दोनों मृतकों को मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन एक माह बाद भी न तो जांच पूरी का जा सकी न ही मृतकों को मुआवजा दिया जा सका।