आजमगढ़ के जेलर दीप सागर सिंह और वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या के आरोपी माफिया रमेश सिंह काका को गोरखपुर जेल में शिफ्ट किया गया है। आजमगढ़ जेल से गोरखपुर शिफ्टिंग का अनुमति पत्र (आदेश) यहां पहुंचे बिना फोर्स की घेराबंदी में काका के पहुंच जाने से स्थानीय जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
काका को आजमगढ़ जेल से कड़े सुरक्षा घेरे में लेकर पुलिस टीम रविवार तड़के तीन बजे गोरखपुर कारागार पहुंची। काका के साथ आई फोर्स के पास उसकी आजमगढ़ से गोरखपुर जेल शिफ्टिंग के लिए आजमगढ़ के डीएम का आदेश था लेकिन गोरखपुर जेल प्रशासन तक इसकी कोई लिखित सूचना नहीं पहुंची थी। इसके चलते जेल प्रशासन उसके कारागार में दाखिले को लेकर काफी देर दुविधा में उलझा रहा।
बाद में काका के साथ आई टीम के पास मौजूद डीएम आजमगढ़ के आदेश को आधार बनाकर गहन तलाशी बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने काका को जेल में दाखिल करा दिया। उन्होंने बताया कि गोरखपुर जेल शिफ्टिंग का अनुमति पत्र न मिलने के बाद भी काका को यहां शिफ्ट करने की जानकारी डीआईजी जेल को दे दी है। काका को नेहरू बैरक में रखा गया है, जहां बीआरडी कांड के आरोपी डॉ. राजीव मिश्रा सहित कई अन्य बंदी पहले से हैं।
जेलर के हत्यारोपी और जेलर पुत्र के साथ ने कान खड़े किए
आजमगढ़ के जेलर दीप सागर सिंह और वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या के आरोपी माफिया रमेश सिंह काका की गोरखपुर जेल में शिफ्ट़िग का अनुमति पत्र मिलने से पहले काका की आमद ने जहां स्थानीय जेल प्रशासन को चौंका दिया, वहीं जेलर दीप सागर सिंह के बेटे अनिल सिंह के गोरखपुर जेल में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत होने से भी अफसरों की चिंता बढ़ गई है।
माफिया काका पर आरोप है कि उसने आजमगढ़ जेल परिसर में ही तत्कालीन जेलर दीप सागर सिंह पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में दम तोड़ने से पहले लहूलुहान दीप सागर सिंह ने खून से जमीन पर काका का नाम लिख दिया था। आजमगढ़ जेलर और वाराणसी के डिप्टी जेलर की हत्या में आरोपी बनने के बाद भी जेल में उसके उत्पात कम नहीं हुए। जेल से गैंग संचालित करने और एक प्रभावशाली शख्स को जेल में पीट देने की घटना के बाद उसे आजमगढ़ से गोरखपुर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया।
आजमगढ़ जेल के भीतर हमले में जान गंवाने वाले दीप सागर सिंह के पुत्र अनिल सिंह के पहले से गोरखपुर जेल का स्टाफ होने के कारण स्थानीय जेल अफसरों की चिंता बढ़ गई है। कारागार सूत्रों का कहना है कि काका और अनिल सिंह की एक ही जेल में मौजूदगी को लेकर जेल का भीतरी सुरक्षा घेरा और कसना होगा।
मुख्तार का विरोधी है काका
मऊ के बड़े माफिया में शुमार रमेश सिंह काका को बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का विरोधी माना जाता है। दोनों के बीच पुरानी अदावत चर्चा में रहती है। कारागार सूत्रों की मानें तो गोरखपुर के कई बदमाश काका के संपर्क में हैं। यही नहीं काका के शूटर गोरखपुर जेल से पेशी के दौरान फरार भी हो चुके हैं। लिहाजा गोरखपुर जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अफसर और गंभीर हो गए हैं।