खोराबार। ‘अंकल मेरी मां मर गईं। दोनों भाइयों के साथ मुझे लेकर पापा बड़गो में किराए के कमरे में रहते हैं। मजदूरी करते हैं। दिनभर बाहर रहते हैं तो मैं इन दोनों खिलाती-पिलाती हूं। शाम को शराब पीकर आते हैं तो हम तीनों को बहुत मारते हैं। हम लोगों की कोई बात नहीं सुनते। शुक्रवार की सुबह भी मारा था तो उनके जाने के मैं दोनों भाइयों को लेकर घर से भाग आई। हमको घर मत भेजिए, पापा फिर बहुत मारेंगे।’ मासूम आंखें, उनमें आंसू और पिता की पिटाई का खौफ, होठों पर घर न भेजने की विनती। उम्र महज आठ साल, लेकिन स्थितियों ने पांच साल और छह साल के भाइयों के साथ घर छोड़ने को मजबूर कर दिया। ये कहानी है पिता की पिटाई से परेशान एक बच्ची की।
मूलरूप से कुशीनगर, हाटा के सिंहपुर के रहने वाले सीताराम गोरखपुर में रहकर मजदूरी करते हैं। कुछ साल पहले पत्नी का देहांत हो गया तो आठ साल की बेटी और छह व पांच साल के दो बेटों को लेकर गोरखपुर चले आए। लेकिन आदत बिगड़ गई। शराब पीना और बच्चों को मारना रोज की बात हो गई। शुक्रवार सुबह भी यही किया तो आठ साल की बेटी ने भाइयों के साथ घर छोड़ना ही बेहतर समझा। भटकते हुए शाम को नौका विहार के पास तो पहुंच गई। लेकिन अंधेरा होने के साथ ही हौसला भी छूट गया। तीनों बच्चे एक जगह बैठे रो रहे थे तो कुछ लोगों ने वजह पूछी और पुलिस को सूचना दी। पुलिस तीनों को थाने ले आई तो पूरी बात सामने आई। रात में उन्हें चाइल्ड लाइन भेज दिया गया।
पिता की पिटाई से परेशान होकर तीनों बच्चे घर छोड़कर नौका विहार पहुंच गए थे। पुलिस उन्हें थाने लाई। उनके द्वारा बताए गए नाम पते पर संपर्क किया गया। जब काफी देर तक कोई नहीं आया तो बच्चों को चाइल्ड लाइन भेज दिया गया है।
- अशोक राजेश कुमार, थाना प्रभारी, खोराबार
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