गोरखपुर।
बीआरडी कांड में नामजद सभी नौ अभियुक्तों को जेल भेजने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। पुलिस अब कमीशनखोरी की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज का पुष्पा सेल्स से करार, ऑक्सीजन सप्लाई, भुगतान हर बिंदु पर जांच शुरू कर दी गई है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस के हाथ कई ऐसे सबूत लगे हैं, जिससे रिटायर्ड कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं। इन्हें भी जेल जाना पड़ सकता है। ये सबूत पुराने कमीशनखोरों की गर्दन तक पहुंचने में मददगार साबित होंगे।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद भले ही कमीशनखोरी का मामला खुलकर सामने आया है, लेकिन बीआरडी में यह खेल नया नहीं है। इस खेल से एक-एक कर पर्दा उठाने का काम पुलिस ने शुरू कर दिया है। हालांकि पुलिस अफसर अभी किसी के नाम पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं लेकिन एसएसपी जांच का दायरा बढ़ाए जाने की पुष्टि कर रहे हैं। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का कहना है कि पुलिस विवेचना कर रही है। कमीशनखोरी की पूरी पड़ताल कर जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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यह है मामला
पिछले महीने 9 से 11 अगस्त के बीच मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से कई बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. कफील खान, उदय कुमार, चीफ फॉर्मासिस्ट गजानन जायसवाल, संजय त्रिपाठी, सुधीर के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। ये सभी आरोपी अब जेल में हैं।