गोरखपुर।
मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सर्वे कर रही कंपनी के कर्मचारी मनीष कुमार से रंगदारी मांगने, अपहरण और मारपीट के मामले में छात्र नेता अखिल देव त्रिपाठी की कोई भूमिका नहीं है। मंगलवार को मनीष कुमार और मेट्रो सर्वे कंपनी के कोआर्डिनेटर विष्णुनाथ प्रताप सिंह ने छात्र नेता को बेकसूर बताते हुए कहा कि कुछ मनबढ़ आए थे जिन्होंने अपना नाम अखिल देव बताया था। उनकी बातों पर विश्वास कर गलतफहमी की वजह से नामजद तहरीर दे दी गई थी।
पत्रकारों से बातचीत में मनीष ने कहा कि उनके साथ मारपीट करने वाले अपना नाम अखिल देव त्रिपाठी बताया था। इसी आधार पर केस दर्ज करा दिया। लेकिन बाद में जब अखिलेदव को देखा तो असलियत का पता चल सका। मैंने पुलिस को भी इस बारे में जानकारी दे दी है। छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलदेव त्रिपाठी ने कहा कि उनकी उपलब्धियों को देखते हुए फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश रची गई थी। लेकिन मेरे सकारात्मक एवं छात्र हितों के प्रति समर्पण की भावना के आगे विरोधियों की एक भी चाल सफल नहीं होगी।