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सवाल बरकरार, फिर भी फाइल बंद करने की तैयारी

Sat, 08 Sep 2018 12:34 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (पीओ) तरुण शुक्ला की खुदकुशी की वजह के साथ ही तमाम सवालों के जवाब पुलिस को अब भी नहीं मिल सके हैं, मगर पुलिस अब फाइल बंद करने की तैयारी में है।
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सरकारी बंगले के गेस्ट रूम में तरुण की लाश मिली थी। पुलिस का दावा है कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़ा गया था। सुसाइड नोट दो रंग की पेन से लिखा गया था, लेकिन कमरे से पेन नहीं मिली। पास में सोफे पर जो खाली गिलास मिला था, उससे विशेष पेय की गंध आ रही थी, मगर पुलिस की छानबीन में मौके से कुछ और नहीं मिला।

 

चार सितंबर को रिवाल्वर से गोली भी चली, लेकिन अब सवाल यह है कि कमरे में गोली चली तो घर में किसी को जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया, पुलिस की जांच में खुदकुशी की पुष्टि हुई है। सुसाइड नोट को जांच के लिए भेजा गया है। कॉल डिटेल में भी कुछ खास नहीं मिला है। पुलिस एक-एक बिंदु की जांच कर रही है। जल्द ही पूरी स्थिति साफ होगी।

फोरेंसिक टीम से भी नहीं कराई गई जांच

छोटी से छोटी चोरी की घटना में भी जांच के लिए फोरेंसिक टीम मौके पर जाती है लेकिन इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी पुलिस ने फोरेंसिक टीम को मौके पर नहीं बुलाया। मौत के बाद फिंगर प्रिंट, गिलास पर अंगुली के निशान जैसे तमाम साक्ष्य जुटाने में फोरेंसिक टीम की ही मदद ली जाती है, मगर पुलिस ने अपने स्तर से जांच की। हालांकि अब जब मामला उलझा है तो सुसाइड नोट की जांच कराने की बात कही जा रही है।

क्राइम सीन से छेड़छाड़ की गुंजाइश पर इशारा खुदकुशी के ही

रिवाल्वर का सीने पर रखे रहना, खाली गिलास का मिलना और पानी की बोतल या अन्य पेय पदार्थ का न मिलना जैसे तमाम सवाल हैं जिससे क्राइम सीन से छेड़छाड़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन दरवाजा का अंदर से बंद होना और शरीर पर चोट के निशान न मिलने जैसे कई साक्ष्य आत्महत्या की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। खुदकुशी की असली वजह घरवाले जानते हाेंगे। यह मामला व्यक्तिगत हो सकता है जिसे परिवार बाहर नहीं लाना चाहता। खुदकुशी का तथ्य मिलने के बाद फाइल बंद कर दी जाती है। यदि कोई आपत्तिजनक सामान या सुराग मिलता है, तभी जांच आगे बढ़ती है।
- शिवपूजन यादव, रिटायर पुलिस उपाधीक्षक

गहरे अवसाद में इंसान उठाता है आत्मघाती कदम

तरुण शुक्ला ने जिस तरह से खुदकुशी की, उससे साफ है कि वह गहरे अवसाद में थे। अवसाद के चरम पर पहुंचने पर व्यक्ति खुद को असहाय महसूस करने लगता है। जीने की उसकी सारी इच्छाएं खत्म हो जाती है। वह एकांत में रहना चाहता है। ऐसा नहीं है कि खुदकुशी करने वाला इंसान ऐसा फैसला अचानक लेता है। ऐसे व्यक्ति के मन में लंबे समय से सवाल उठते रहते हैं। वह आत्महत्या का सटीक और आसान तरीका सोचता है और पूरी योजना बनाकर ही आत्मघाती कदम उठाता है। अवसादग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। यदि उसके साथी या घरवाले ध्यान दें तो उन्हें भी इसका एहसास होगा। मोबाइल पर किसी से बात न करना, आफिस न जाना जैसा ऐसे ही व्यवहार हैं, जिससे यह साबित होता है कि वह गहरे अवसाद में थे।
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- प्रो. धनंजय कुमार, मनोविज्ञानी, गोरखपुर विश्वविद्यालय

ये है मामला

चार सितंबर को कौवाबाग स्थित घर के गेस्ट रूम में तरुण शुक्ला की लाश मिली थी। उन्होंने सुबह 11 बजे से ही खुद को कमरे में बंद रखा था और शाम छह बजे के करीब बेटी ने उनका शव देखा। उनका शरीर सोफे पर था और सामने मेज पर पैर एक दूसरे पर चढ़े थे। पास से ही पुलिस ने एक सुसाइड नोट भी बरामद किया था।
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