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जंगल में डिप्टी रेंजर को गोली मारी
मेडिकल कॉलेज में भर्ती, अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज
चालक सहित कार कब्जे में, जांच में जुटी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। खोराबार के रामलखना जंगल में शुक्रवार रात अवैध कटान रोकने गए डिप्टी रेंजर डीएन पांडेय को वन तस्करों ने गोली मार दी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। सूचना पर चार थाने की फोर्स पर पहुंच गई। पुलिस ने चालक समेत कार को कब्जे में लिया है। वन रक्षक राजकरन की तहरीर पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या की कोशिश सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
रात करीब एक बजे डिप्टी रेंजर डीएन पांडेय को अवैध कटान की सूचना मिली थी। वह वन विभाग के सुरक्षा कर्मियों के साथ सूबा बाजार वन बीट के रामलखना जंगल में पहुंचे। वहां 16 बोटा लकड़ी काटी जा चुकी थी। टीम को देखते ही वन तस्करों में भगदड़ में मच गई और खुद को घिरा देख फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा कर्मियों ने भी फायरिंग की लेकिन वन तस्कर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। तस्करों की गोली से डिप्टी रेंजर घायल हो गए। मौके पर पहुंची फोर्स ने तस्करों की तलाश शुरू की। इसी दौरान एक जायलो कार को चालक सरोज सहित कब्जे में ले लिया गया, जिसमें कटी हुई लकड़ी बरामद हुई। चालक ने पुलिस को बताया कि कार संतकबीनगर के अनिल गुप्ता की है। वह कार दो हजार रुपये में किराए पर लिया था।
कोट
वन रक्षक की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। तस्करों की पहचान हो गई है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
- शलभ माथुर, एसएसपी
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जंगलों में मुठभेड़ कोई नई बात नहीं
पहले भी तड़तड़ा चुकी हैं गोलियां, कटान में विभाग की भूमिका संदिग्ध
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जंगल में अवैध कटान को लेकर वन विभाग की टीम और तस्कर कई बार आमने-सामने हो चुके हैं। मुठभेड़ में कामयाबी हर बार वन पुलिस के हाथ ही लगती है। इससे इनकी भूमिका पर भी सवाल भी उठते हैं। कटान की जानकारी वन रक्षक को होती है लेकिन जब कोई वन अफसर मौके पर पहुंचता है तब मुठभेड़ हो जाती है। खुद एक वन अफसर भी दबी जुबान इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने गोपनीय तरीके से विभागीय लोगों की भूमिका की जांच शुरू करा दी है।
गोरखपुर मंडल में महाराजगंज जंगल के दो रेंज भी आते हैं। इन इलाकों में तस्करों के साथ वन कर्मियों की मुठभेड़ होती रहती है। कटान के बाद लकड़ी ले जाते समय ही पुलिस पकड़ पाती है। अक्सर वन पुलिस के साथ होने वाली मुठभेड़ में लकड़ी तो बरामद होती है, लेकिन तस्कर कम ही पकड़े जाते हैं।
पूर्व में हुईं घटनाएं
28 अगस्त 2015 : कुसम्ही जंगल में वन कर्मचारियों में मुठभेड़
28 सितंबर 2015 : कुसम्ही जंगल में वन कर्मचारियों से मुठभेड़, वन कर्मी घायल
28 नवंबर 2015 : कुसम्ही जंगल में वन कर्मचारियों पर हमला, फायरिंग में एक तस्कर घायल
11 दिसंबर 2015 : जंगल टिकरिया में मुठभेड़ के दौरान 22 बोटा लकड़ी बरामद, चार वाहन सीज
19 जनवरी 2015 : कुसम्ही जंगल में पेड़ काट रहे तस्कर रंगे हाथ पकड़े गए
14 जनवरी 2016 : तिनकोनिया जंगल में तस्करों से मुठभेड़
15 जुलाई 2017 : सूबा बीट के वनसप्ती जंगल में मुन्ना गुप्ता की आरा मशीन पर कार्रवाई के दौरान टीम पर हमला।
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14 वन तस्करों पर हो चुकी है कार्रवाई
गोरखपुर। मुख्य वन संरक्षक हेमंत कुमार ने बताया कि गोरखपुर जिले के खोराबार क्षेत्र के दयानंद उर्फ दयालु, गुलरिहा के नरसिंह पांडेय, इसी थाने के महराजगंज गांव के दिनेश व कैंपियरगंज के लक्ष्मीपुर निवासी जीतन यादव को वन माफिया घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा महराजगंज जिले के बड़गड़ा के दो भाई सदरे आलम व बदरे आलम, बरियारपुर, पनियरा के जमशेद, जंगल बांकी पनियरा के चंद्रकेश उर्फ रिंकू, छितही बुजुर्ग पनियरा के राजू, पुरंदरपुर टोला सोमनगंज फरेंदा के संतराम, कतवारू व मूसे और बचगंगपुर बृजमनगंज के शंभू साहनी को भी वन माफिया घोषित किया गया है।
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पेड़ों को गिराने के लिए करते हैं ट्रेनों का इंतजार
वन तस्कर दिन में करते हैं जंगलों की रेकी, फिर शुरू होती है पेड़ों की कटान
रोहित सिंह
गोरखपुर। वन तस्करों ने पेड़ों की कटान के लिए अनोखा तरीका इजाद किया है। जंगलों के पास से ट्रेनों के गुजरने के समय ही पेड़ काटकर गिरा दिए जाते हैं। इससे पेड़ के गिरने की आवाज दब जाती है और फिर आराम से उसे टुकड़ों में तब्दील कर उठा ले जाया जाता है। शुक्रवार की रात भी ऐसा ही हुआ। काटे गए पेड़ों को बोटों में तब्दील करने की सूचना पर जब डिप्टी रेंजर टीम के साथ पहुंचे तो वन तस्करों से उनकी मुठभेड़ हो गई, जिससे गोली लगने से वह घायल हो गए।
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक तस्कर पहले पटाखा फोड़कर काटे गए पेड़ को गिराते थे। लेकिन यह तरीका पुराना और अधिकारियों की जानकारी में होने की वजह से इसे बंद कर ट्रेनों का सहारा लिया जाने लगा। अब पेड़ को एक तिहाई काटने के बाद ट्रेनों के गुजरने के दौरान उसे गिराया जाता है। काटने से पहले तस्कर जंगलों में दिन में बाइक से रेकी कर पेड़ों पर निशान लगा देते हैं। सूत्रों की माने तो विभाग की तरफ से नियमित गश्त न होने से भी कटान पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
दूसरी गैंग के आने पर होता है टकराव
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर कटान वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से होती है। कभी-कभी जब दूसरा गैंग पेड़ कटाने के लिए पहुंचता है तो टकराव की नौबत आ जाती है। या फिर तस्कर से डील करने वाले अधिकारी की जगह दूसरा अधिकारी पहुंचता है तब फायरिंग जैसी घटनाएं होती हैं।