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फर्जी आरसी बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

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गोरखपुर। गाड़ियों का फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल), अंकपत्र और चोरी की गाड़ियों का कागजात तैयार कर ठगी करने वाले गिरोह का कैंट पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के पांच सदस्यों के पास से फर्जी दस्तावेज, प्रिंटर, स्केनर समेत कई आपत्तिजनक वस्तुओं के साथ चोरी की दो बाइक भी बरामद हुई है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज कर पुलिस ने जेल भेज दिया। लंबे समय से सक्रिय इस गिरोह के संपर्क में रहने वाले आरटीओ के कई लिपिकों के नाम भी सामने आए हैं। जल्द ही कुछ लोग और पुलिस की गिरफ्त में आ सकते हैं।
सीओ कैंट अभिषेक सिंह ने पत्रकारों के सामने गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बताया कि आरटीओ परिसर में सक्रिय दलालों के जरिए फर्जी कागजात तैयार कर ठगी करने की सूचना मिली थी। इस आधार पर सोमवार को कैंट इंस्पेक्टर मनोज पाठक, क्राइम ब्रांच के अनिल उपाध्याय ने फोर्स के साथ तिवारीपुर के तकिया कवलदह निवासी विजय गुप्ता उर्फ छोटू को उसके घर छापा डालकर पकड़ा। मौके से गाड़ियों का सादा रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, कूटचरित कागजात, अर्द्धनिर्मित कागजात, प्रिंटर, स्केनर, सीपीयू, मानीटर, कंप्यूटर, पालीटेक्निक फैजाबाद से जारी प्रमाण पत्र, इलाहाबाद परीक्षा नियामक प्राधिकरण और पंजीयन अधिकारी मोटर वाहन, गोरखपुर के मुहर सहित कई अभिलेख बरामद किए गए। विजय से पूछताछ के बाद अन्य चार आरोपियों चिलुआताल बरगदवां आवास विकास कालोनी के अधिवक्ता योगेंद्र मिश्र, गुलरिहा थानाक्षेत्र के शीतलपुर महराजगंज के बलिराम, खोराबार के महेंद्र पासवान और अजय पांडेय को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से चोरी की दो बाइक भी मिली है।
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फर्जी आरसी ने खोला मामला
गोरखपुर। करीम नगर राप्तीनगर फेज फोर के प्रभात आनंद ने पंजाब आरटीओ में दर्ज एक टवेरा गाड़ी खरीदी थी। गाड़ी के मालिकाना हक के स्थानांतरण कराने के लिए उन्होंने खुद को अधिवक्ता बताने वाले योगेंद्र मिश्र से संपर्क संपर्क साधा। आरोप है कि योगेंद्र ने स्थानांतरण कराने के लिए उनसे 22500 रुपये ले लिए। योगेंद्र ने उन्हें साथ लेकर आरटीओ कार्यालय में तैनात दो लिपिकों से बात कराई। प्रभात को मिले कागजात में गोरखपुर की जगह पंजाब के नंबर का ही सीरीज दर्ज था, जबकि स्थानांतरण के बाद उन्हें गोरखपुर के सीरीज का नंबर मिलना चाहिए था। इसी से शक गहराया और बार-बार योगेंद्र के टालने के बाद उन्होंने जब आरटीओ में जांच कराई तो कूटरचित कागजात की जानकारी हुई। इसके बाद प्रभात ने कैंट थाने में तहरीर दी।
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सरगना योगेंद्र पहले भी जा चुका है जेल
गोरखपुर। पुलिस की पड़ताल में फर्जी कागजात तैयार कर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना योगेंद्र मिश्र ही निकला। इसके पहले भी फर्जी कागजात तैयार करने के मामले में वह जेल जा चुका है। महेंद्र और अजय गाड़ियां चुराकर लाते थे और योगेंद्र उनके फर्जी कागजात तैयार करता था।
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