आठ साल पहले सिद्धार्थनगर से न्यायिक अभिरक्षा से फरार और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश सुशील तिवारी को गोरखपुर एसटीएफ ने सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार कर लिया है। वह कई सालों से नेपाल में रह रहा था। सुशील के तार माओवादियों से जुड़े रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद उसे सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ थाने में दाखिल किया गया है। अब स्थानीय पुलिस मुकदमा दर्ज कर इनामी बदमाश को जेल भेजने की कार्रवाई करेगी। सिद्धार्थनगर पुलिस का वह मोस्ट वांटेड था।
सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ थानाक्षेत्र से 23 अगस्त 2008 को 38 किलोग्राम चरस के साथ सुशील तिवारी और उसके साथी रोहित बरई को गिरफ्तार किया गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय से सुशील को 12 साल की सजा हुई। 12 जनवरी 2010 को सुशील को पेशी के लिए पुलिस वैन से न्यायालय ले जा रही थी, मगर रास्ते में वैन दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसमें कई मुल्जिम और पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसका फायदा उठाकर सुशील भाग निकला। तभी से सुशील की गिरफ्तारी की कोशिशें चल रही थीं। इसी बीच एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह को नेपाल के कपिलवस्तु जिले के थाना तौलिहवा के नया कस्बा टोला में ठिकाना बनाने वाले सुशील के शोहरतगढ़ आने की सूचना मिली।
एसएसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक एस. आनंद को छानबीन में लगाया। अपर पुलिस अधीक्षक ने गोरखपुर की टीम के साथ बुधवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि इनामी बदमाश किसी व्यक्ति से मिलने नेपाल से भारत आया था। उसे मंगलवार की रात नेपाल लौटना था लेकिन पुख्ता सूचना के आधार पर एसटीएफ ने उसे धर दबोचा।
डीआईजी बस्ती ने घोषित किया था इनाम
पुलिस की पकड़ से दूर सुशील तिवारी पर बस्ती के डीआईजी ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। तस्करी के पुराने मामले में इस बदमाश को 12 साल की सजा हो चुकी है।
भारत से फरार बदमाशों को शरण देता था सुशील
भारत से फरार अपराधियों को सुशील नेपाल में शरण देता था। तस्करी की गतिविधियों में उसके संलिप्त होने की सूचना भी मिली है। इसकी छानबीन में एसटीएफ की टीम लगी है। सुशील से संपर्क रखने वाले तस्करों की तलाश की जा रही है।
गिरफ्तार करने वाली एसटीएफ की टीम
इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह, भानु प्रताप सिंह, अभिमीत तिवारी, अनूप राय, यशवंत सिंह, उमेश सिंह, महेंद्र सिंह, आशुतोष तिवारी, इंद्र प्रताप और संतोष सिंह।