प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत मेडिकल कॉलेज में शुरू होने वाली सुपर स्पेशियलिटी सेवा की मुश्किलें दूर होने के नाम नहीं ले रहीं। पहले आर्थिक और फिर राजनीतिक लड़ाई के बाद अब तय स्थान पर अवैध कब्जे का पेंच फंस गया है।
हालांकि यह कब्जा कॉलेज परिसर में ही बन रहे बाल चिकित्सा संस्थान के मजदूरों का है, जो कि अस्थाई तौर पर झोपड़ी डाल कर रह रहे हैं। लेकिन कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी ने इसी आधार पर कॉलेज को आपत्ति पत्र लिखा है। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने जवाब में अवैध कब्जे से इन्कार कर दिया है।
2011 में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मेडिकल कॉलेज में करीब डेढ़ सौ करोड़ की लागत से बनने वाले सुपर स्पेशियलिटी सेंटर की योजना पर पहला ग्रहण तब लगा जब कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए 2012 में दो सौ 20 करोड़ की मांग भेज दी। केंद्र सरकार ने अस्वीकार किया तो कॉलेज तय रकम पर भी कार्य शुरू कराने को तैयार हो गया। दूसरा ग्रहण तब लगा जब केंद्र सरकार ने धनराशि की मंजूरी देने के बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को पीएमएसएसवाई योजना से बाहर कर दिया। सदर सांसद योगी आदित्यनाथ और राज्यसभा सदस्य कनकलता सिंह के प्रयास से कॉलेज को एक बार फिर योजना में लाया जा सका। अब कार्यदायी संस्था सीपीडब्लूडी ने बाल संस्थान के मजदूरों की अस्थाई रिहाइश को अवैध कब्जा बताकर एक बार फिर निर्माण कार्य के शुरू होने में पेंच फंसा दिया है।
कार्यदायी संस्था ने सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग बनाए जाने वाले स्थान पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। वहां कोई अवैध कब्जा नहीं है। बाल संस्थान में काम करने वाले मजदूरों ने अस्थाई डेरा बनाया हुआ है, जिसे काम शुरू होते ही हटा दिया जाएगा। इस बाबत जवाब भेज दिया गया है।
- प्रो. राजीव कुमार मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज