सदर तहसील में रजिस्टर जांचते डीएम।
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तिवारीपुर के शेख मोहम्मद मुस्तफा ने खतौनी में नाम दर्ज कराने के लिए तहसील दिवस में आवेदन किया था। तहसील कार्यालय ने निस्तारण की जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें बताया गया कि अमल दरामद के लिए न्यायिक प्रक्रिया में आए। फोन पर जब उनसे मामले में प्रगति जांची गई तो उन्होंने घिघियाते हुए बताया कि साहब- अभी तक तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। इसी तरह सोनमती देवी को बिजली विभाग से मुआवजा मिलना था। रजिस्टर में उनका मामला निस्तारित बताया गया, मगर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी तक उन्हें कुछ भी नहीं मिला।
ये सिर्फ बानगी है। तहसील सदर के औचक मुआयने के दौरान तहसील दिवस में आने वाले फरियादियों से जब डीएम ओएन सिंह ने फोन पर बात की तो रजिस्टर पर दर्ज निस्तारण की सभी रिपोर्ट फर्जी पाई गईं। नरहरपुर गुलरिहा के राम प्रसाद गुप्ता ने गांव में शौचालयों के निर्माण में धांधली की शिकायत की थी। मामले का निस्तारण करते हुए तहसील दिवस के रजिस्टर में बताया गया कि एडीओ पंचायत से बात हुई। उन्होंने जांच की। मगर जांच में शिकायत सही पाई गई या नहीं। या फिर किसी पर कार्रवाई हुई की नहीं, इसका कोई जिक्र नहीं हुआ।
डीएम ने जब फोन कर राम प्रसाद से फीडबैक लिया तो उन्होंने बताया कि अभी तक जांच के लिए कोई आया ही नहीं। इस पर डीएम ने सीडीओ को गांव में बने सभी शौचालयों की गुणवत्ता आदि की जांच कर उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा। इसी तरह डीएम ने ऐसे करीब 10 शिकायतकर्ताओं से फोन पर बात की, जिनके मामले रजिस्टर पर निस्तारित बताए गए थे। इनमें से किसी भी मामले का निस्तारण सही नहीं पाया गया।
इस पर खफा डीएम ने तहसीलदार सत्येंद्र सिंह और एसडीएम सदर पंकज वर्मा पर जमकर नाराजगी जताई और सभी मामलों के सप्ताह भर में गुणवत्तायुक्त निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोबारा मामले का फर्जी निस्तारण पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई तय है।
यही नहीं उन्होंने दूसरी तहसीलों के एसडीएम और तहसीलदार को भी आगाह किया कि जल्द ही उनकी तहसीलों का भी वे मुआयना करेंगे और अगर गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।