45 लाख रुपये बकाया न मिलने पर मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली संस्था ने उधार देने से मना कर दिया है। इससे एक हजार बेड वाले मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों की सांसों पर कभी भी संकट आ सकता है। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन बजट न होने की बात कह रहा है।
मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए जाने वाले लगभग 1000 मरीजों को विषम परिस्थितियों में लिक्विड ऑक्सीजन के सहारे सांसें दी जाती हैं। लखनऊ की पुष्पा सेल्स कंपनी के पास वर्षों से मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका है। कंपनी पिछले कुछ माह से यहां उधार ही लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई कर रही थी। संस्था भुगतान न मिलने की वजह से बार-बार पत्राचार से धन की डिमांड करती रही। अब कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों की मानें तो कंपनी ने सभी कर्मचारियों को इससे अवगत करा दिया है। कहा है कि यदि समय रहते बकाए का भुगतान नहीं हुआ तो ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी जाएगी। बताते दें कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को 86 लाख रुपये के भुगतान के लिए कई बार लेटर लिखा था। इसके बाद प्रशासन ने किसी तरह से 40 लाख रुपये का भुगतान किया था। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन बजट न मिलने का हवाला देकर भुगतान के संबंध में हीलाहवाली कर रहा है।
आचारसंहिता की वजह से कंपनी का भुगतान रुका हुआ है। इस बाबत लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई देने वाली कंपनी को पत्र भेजकर बजट न होने की बात भी बता दी गई है। चुनाव बाद बजट की व्यवस्था कर कर भुगतान कर दिया जाएगा।
-डॉ. राजीव मिश्रा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।