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हां, अब भी गंदा है शहर : कमिश्नर 

Wed, 17 May 2017 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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शहर में इसी तरह जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। - फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले शहर की सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई हो लेकिन नगर निगम के अफसर, कर्मचारी सुधरने को तैयार नही हैं। इसी का नतीजा है कि कमिश्नर अनिल कुमार ने भी स्वीकार किया कि शहर अब भी गंदा है। साफ-सफाई के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। कमिश्नर ने यह भी कहा कि सफाई व्यवस्था की मानीटरिंग वह खुद करेंगे। क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्था को प्रभावी बनाएंगे। निगम के कुछ लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई भी होगी।
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शहर में गंदगी को लेकर कमिश्नर ने यह टिप्पणी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की जानकारी देने के दौरान की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले उन्होंने करीब दो दर्जन इलाकों का निरीक्षण किया था। गंदगी मिलने पर कुछ अफसरों से जवाब-तलब के साथ ही उनके वेतन रोकने की कार्रवाई भी की। चुनाव बाद अब उन्होंने फिर से निरीक्षण शुरू किया है। इसका असर जल्द ही दिखेगा। बताते चलें कि हाल ही में गोरखपुर आए सीएम ने नगर आयुक्त को हिदायत दी थी। कहा था कि गंदगी से शहर की छवि खराब हुई है।  

कमिश्नर करेंगे निरीक्षण
कमिश्नर शहर के प्रमुख बाजारों, चौराहों और सड़कों का निरीक्षण करेंगे। अगर कहीं भी गंदगी मिली तो कार्रवाई तय है। कमिश्नर ने कहा कि वार्डों में भी नियमित सफाई नहीं करने या ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मानीटरिंग सुपरवाइजर भी नपेंगे। 
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सर्वेक्षण में फिसड्डी
स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर फिसड्डी साबित हो चुका है। करीब तीन साल पहले ही सपा सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन ने भी शहर को गंदा बताया था। उन्होंने नगर आयुक्त को सफाई व्यवस्था पर ध्यान देने की नसीहत भी दी थी। बावजूद इसके नगर निगम नहीं चेत रहा। 

एक आदेश बना मुसीबत
नगर आयुक्त को अधिकार देने से संबंधित एक शासनादेश मुसीबत बन गया है। इसके तहत नगर आयुक्त को बार-बार कमिश्नर या फिर डीएम की मीटिंग में जाने से छूट है। इसी शासनादेश का सहारा लेकर नगर आयुक्त मीटिंग में जाने से बच जाते हैं। बड़े अफसर नगर आयुक्त के प्रतिनिधियों से सवाल-जवाब जरूर करते हैं लेकिन इसका असर जमीन पर नहीं दिखता।
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