कॉपियों में हेरफेर कर छात्रों को फेल करने के आरोपी महाराजगंज के भागीरथी कृषक महाविद्यालय मामले की जांच लटक गई है। यूनिवर्सिटी की ओर से गठित जांच समिति ने शनिवार को महाविद्यालय प्रबंधन को बुलाया था, लेकिन उनकी जगह कार्यवाहक प्राचार्य मनोज ओझा और एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी पेश हुए। इन्होंने परीक्षा के दौरान केंद्र पर तैनात पर्यवेक्षकों को बुलाने के लिए समय मांगा है। इस पर जांच समिति ने उन्हें दो नवंबर को समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का आखिरी मौका दे दिया। हालांकि, जांच समिति के संयोजक प्रो. संजीत गुप्ता ने शनिवार को प्रबंधन के न आने पर बड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी, मगर ऐसा नहीं हुआ।
भागीरथी कृषक महाविद्यालय की बीए गृह विज्ञान की छात्रा राधिका पटेल, बीए के छात्र रामनगीना यादव और छात्रा कुमकुम लता वरुण ने महाविद्यालय प्रबंधन पर कॉपियों की हेराफेरी करके जबरन फेल करने का आरोप लगाया था। इसे गंभीरता से लेते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने पहले विद्यार्थियों का पक्ष जाना। इसमें उन्होंने आरोप कुछ हद तक सही पाया था। इसके बाद प्रबंधन को जवाब देने बुलाया गया था तो पहले तो उन्होंने उस वक्त के कार्यवाहक प्राचार्य त्रिभुवन पटेल, लिपिक अभिषेक पटेल और एक अन्य शिक्षक को निलंबित करने की सूचना समिति को भेजी थी। दूसरी तारीख पर प्रबंधन के किसी व्यक्ति ने खुद न आकर कार्यवाहक प्राचार्य को भेज दिया।
प्राचार्य ने समिति से कहा कि उन्होंने हाल ही में महाविद्यालय में पदभार ग्रहण किया है। उनके पास मामले से संबंधित कोई जानकारी नहीं है। इसलिए वे अगली तिथि पर पर्यवेक्षक को लेकर उपस्थित होंगे। अब शिकायत करने वाले विद्यार्थी यूनिवर्सिटी पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाने लगे हैं।