50 एकड़ में बनने वाले सैनिक स्कूल को मुख्यमंत्री ने दी हरी झंडी
गोरखपुर। चौरीचौरा कांड की 100वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन विभाग को इसकी रूपरेखा तैयार करने के साथ ही जिले में चल रही पर्यटन की सारी योजनाओं को मार्च तक पूरा करने और नई योजनाओं को तैयार कर भेजने का निर्देश दिया है। इसके अलावा खाद कारखाना परिसर में करीब 50 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले सैनिक स्कूल को मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी। साथ ही सैनिक स्कूल के लिए डीपीआर भेजने को कहा।
रविवार को मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर में जिले में चल रहे विभिन्न विकास वकार्यों की समीक्षा की। बैठक में एनएचएआई के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक ने बताया कि जंगल कौड़िया से कालेसर मार्ग दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक रिंग रोड का प्रस्ताव जल्द ही तैयार कर लेंगे। नगर निगम की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ट्रांसपोर्टनगर को कब्जा से मुक्त करने, राजघाट में बन रहे शवदाह गृह को जल्द बनाने का निर्देश दिया। बैठक में जिला और पुलिस प्रशासन के अलावा पर्यटन, एनएचएआई, नगर निगम समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
:: जलकल परिसर में निर्माणाधीन मल्टीलेवल कार पार्किंग की डिजाइन में बदलाव
रविवार को जीडीए उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष नई योजना का विवरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जलकल परिसर में बन रहे मल्टीलेवल कार पार्किंग की डिजाइन में बदलाव को मंजूरी दे दी है। नई योजना के अनुसार तीन तल पर पार्किंग व तीन पर व्यवसायिक कांप्लेक्स बनाने का प्रस्ताव किया गया। पहले 383 चार पहिया गाडिय़ों को खड़ा करने का प्रस्ताव था लेकिन कांप्लेक्स बनने से इनकी संख्या घट सकती है।
:: नौसड़ से कालेसर तक राप्ती नदी के तटबंध का सुंदरीकरण कराएगा जीडीए
जीडीए ने नौ किलोमीटर लंबे बांध के दोनों ओर का सुदृढ़ीकरण एवं सुंदरीकरण करने के लिए 19.99 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया था। नगर निगम ने पहले ही नौसड़ की ओर से एक किलोमीटर बांध का सुंदरीकरण किया है। बचे हुए आठ किलोमीटर बंधे का सुंदरीकरण जीडीए कराएगा। इस पर करीब 10 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। मुख्यमंत्री ने इसको मंजूरी दे दी है।
:: पराली न जलाएं किसान
खजनी में मुख्यमंत्री ने किसानों से खेत में पराली न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से बड़ी मात्रा में प्रदूषण होता है। इससे बीमारियां फैलती हैं। पराली का इस्तेमाल कंपोस्ट के रूप में किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। पैदावार भी दोगुनी होगी।