दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्वर्ण जयन्ती समारोह के अवसर पर पुस्तक का विमोचन करत?
समाज के विकास के लिए व्यवहारिक शिक्षा जरूरी: मुख्यमंत्री
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा पद्धति को ज्यादा व्यवहारिक बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा शिक्षा का व्यवहारिक दर्शन यह है कि उस क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक आदि विशेषताओं को इस प्रकार जोड़ा जाए कि शिक्षित व्यक्ति की सहभागिता जीवन के हर क्षेत्र में समाज को नेतृत्व देने की हो। यह शिक्षण संस्था के प्राचार्यगण, अभिभावकगण और छात्र-छात्र्राओं की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। मुख्यमंत्री शनिवार को दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित स्वर्ण जयंती समापन समरोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने वृहत चिंंतन करने की सीख दी। बताया कि बुंदेलखंड विकास बोर्ड और पूर्वांचल विकास बोर्ड की पहली बैठकों मेें सदस्यों ने नाली, पानी, खड़ंजे जैसे स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी। जबकि जरूरत एक इलाके का नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल और बुंदेलखंड का विकास करने पर विचार करना है। इसके लिए विश्वविद्यालय, शिक्षण और सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जाए। शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों को शासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान और योजनाओं का हिस्सा बनना चाहिए। इससे समाज में नई चेतना का उदय होगा। हमारे शिक्षण संस्थान समाज की चेतना का केंद्र हुआ करते थे, इस बात का साक्षी हमारा इतिहास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिग्विजयनाथ ने 1932 में जिस समय महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की उस समय न तो वह गोरक्षपीठ के महंत थे और न ही पीठ के पास पर्याप्त साधन थे । उन्होंने अपने शिक्षा गुरु के सम्मान में छोटी की संस्था का बीजारोपण किया जो बाद में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के रूप में आगे बढ़ती गई। गोरक्षपीठ अपनी परंपरा को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है यह हम सबके लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम में वह अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यालय की स्मारिका, महाविद्यालय की पत्रिका अरावली और पुस्तक बौद्ध शिक्षा की वैश्विक प्रासंगिकता का विमोचन किया। स्वर्ण जयंती समारोह में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं विजेता छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। इससे पहले उन्होंने महाविद्यालय में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की और दिग्विजयनाथ वाटिका में पौधरोपण किया। मुख्यमंत्री ने महाविद्यालय सभागार में लिखे गए स्लोगन, साफ-सफाई और अलग-अलग व्यवस्था की तारीफ भी की।
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