शहर से सटे तीन ब्लॉकों के स्कूल शिक्षकों की पहली पसंद हैं। इन स्कूलों में तबादला कराने के कई फायदे हैं। घर के नजदीक स्कूल पर जाना होगा। साथ ही शहरी भत्ता मिलेगा अलग से। यही वजह है कि इन स्कूलों में तैनाती के लिए शिक्षक सत्तारूढ़ दल के नेताओें से लेकर शासन तक हर जतन करने से पीछे नहीं है।
शहरी क्षेत्र का भत्ता ग्रामीण से 1500 से 1900 रुपये तक अधिक है। इसका लाभ पाने के लिए शर्त है कि शहर से आठ किलोमीटर के दायरे में स्कूल होने चाहिए। इस मानक के मुताबिक खोराबार, जंगल कौड़िया और चरगांवा ब्लॉक के स्कूल आते हैं। यहां शायद ही कोई स्कूल ऐसा हो, जहां पद सृजन के हिसाब से तैनाती हो। हर जगह दोगुना या तीन गुना शिक्षक हैं। उदाहरण के तौर पर जूनियर हाईस्कूल पथरा में तीन पर आठ शिक्षक, लहसड़ी में तीन पद नौ शिक्षक, मिर्जापुर में आठ की जगह 15 शिक्षक, प्राथमिक विद्यालय मंझरिया में तीन की जगह छह, प्राथमिक विद्यालय में पांच की जगह आठ शिक्षकों की तैनाती की गई है। ये विद्यालय तो बानगी भर हैं, ऐसे स्कूलों की फेहरिस्त लंबी है।
छात्र संख्या भी घट रही
खोराबार, चरगांवा और जंगल कौड़िया ब्लॉक के अधिकांश स्कूलों में छात्रों की संख्या भी घट रही है। अप्रैल और मई माह में हुई जांच के दौरान 20 से अधिक स्कूलों में छात्र संख्या एक चौथाई भी नहीं मिली। इसके लिए बीएसए ने प्रधानाध्यापकों का वेतन बाधित कर जवाब भी मांगा है।