सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। संपूर्णा बेहरा बनाम भारत सरकार। इसमें सुप्रीमकोर्ट ने आदेश दिया है कि बच्चों को रखने के लिए संस्था को महिला कल्याण विभाग द्वारा पंजीकृत होना चाहिए। जो संस्थाएं पंजीकृत नहीं है उनको बंद करने का आदेश न्यायालय ने दे दिया। अपना घर का पंजीकरण महिला कल्याण विभाग में नहीं हुआ था। इस नाते जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि उसे बंद कर बच्चों को राजकीय बालगृह देवरिया को सुपुर्द किया जाए।
आदेश के क्रम में अपना घर के संचालकों ने 6 बच्चों को राजकीय बाल गृह देवरिया को ट्रांसफर कर दिया। संस्था में कुल 15 बच्चे थे। शेष के बारे में जिला प्रोबेशन अधिकारी ने पूछा तो उन्हें बताया गया कि वे बच्चे बालिग थे इस नाते उन्हें उनके माता पिता को सुपुर्द कर दिया गया। प्रोबेशन अधिकारी समरजीत सरोज इससे संतुष्ट नहीं हुए। इस नाते उन्होंने सभी बच्चों की सूची सहित पूरा ब्योरा मांगा है, जिससे वे अपने स्तर से उसकी जांच करवा सकें कि बच्चे परिजनों के पास गए या कहीं और।