साहब पत्नी को कैंसर है। इलाज के लिए एक रुपया जेब में नहीं है। सरकारी कर्मचारी होने के बाद भी वेतन के लिए 18 महीने से चक्कर लगा रहा हूं। अगर वेतन नहीं मिला तो पत्नी का इलाज कैसे होगा, उसे बचा लीजिए।
ये पीड़ा है डीएम के जनता दरबार में पहुंचे गगहा के रघुराज सिंह किसान इंटर कॉलेज के बाबू गंगा प्रसाद वर्मा की। जिस कॉलेज को उन्होंने पूरा जीवन दिया, अब वहां के जिम्मेदारों की बेरुखी से उन्हें वेतन नहीं मिल पा रहा है। गुजारा के लिए किराने की दुकान पर झाड़ू-पोछा कर खर्च चला रहे हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में गंगा प्रसाद ने बताया कि उनकी तैनाती 1993 में मृतक आश्रित कोटे के तहत कॉलेज में हुई थी। इसी कमाई से उनका घर चलता है, मगर 18 महीने से कॉलेज के प्रबंधक और प्रिंसिपल की मनमानी के चलते उन्हें वेतन नहीं मिल पा रहा है। इससे इलाहाबाद में आईएएस की तैयारी कर रहे छोटे बेटे की पढ़ाई छूट गई। पत्नी के इलाज के लिए रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा। धीरे-धीरे उन पर चार लाख से अधिक का कर्ज हो गया है। इन सबके बावजूद उनको नौकरी से निकालने के लिए हर जतन किए जा रहे हैं। उन्होंने डीएम से न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।