अरे ओ सांभा, कितना ईनाम रखी है सरकार गंदगी फैलाने पर... सरकार 500 रुपये...पूरे पांच सौ रुपये। बाबू मोशाय... कब, कौन, कहां कूड़ा गिराएगा... वगैरह-वगैरह। ऐसे फिल्मी डायलॉग की तर्ज पर गढ़े गए स्लोगन रेलवे के स्वच्छता अभियान पर आपका ध्यान खींचेंगे। इन्हें रेलवे ने अभियान के प्रचार में शामिल किया है। रेलवे स्टेशन पर ऐसे कई फ्लैक्स लगाए गए हैं जिन पर बरबस यात्रियों की निगाहें चली जा रही है।
रेलवे में इन दिनों व्यापक रूप से अभियान चलाया जा रहा है। सामूहिक सफाई से लेकर नाटक, प्रभात फेरी आदि के जरिए यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पोस्टर, हैंडबिल बांटकर लोगों को अभियान से जोड़ा जा रहा है। रेलवे का मानना है कि मशहूर फिल्मी डायलॉग लोगों को दिलो दिमाग में ताजा रहते हैं। इसमें गूंथे स्वच्छता के संदेश पढ़कर लोग इसे भी याद रखेंगे।
फिलवक्त सबसे अधिक चर्चा फिल्मी डायलॉग वाले फ्लैक्स की है। फिल्म शोले का मशहूर डायलॉग ‘कितना ईनाम रखी है सरकार’ के साथ गब्बर सिंह की बड़ी सी तस्वीर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसे देखकर फिल्मी डायलॉग के साथ सफाई का संदेश भी लोगों के जेहन पर चस्पा हो रहा है। स्वच्छता संदेश देकर यात्रियों को जागरूक करने के लिए नया तरीका ईजाद किया है। यात्रियों को सफाई को लेकर संजीदा करने का रेलवे का यह फार्मूला कारगर साबित होता दिख रहा है। बड़े स्टेशनों के बाद ये फ्लैक्स छोटे स्टेशनों पर भी लगाने की योजना है।