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टॉयलेट नहीं बना, गड्ढे में गिरकर भैंस जरूर मर गई

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टॉयलेट नहीं बना, गड्ढे में गिरकर भैंस जरूर मर गई
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गोरखपुर। पिपरौली ब्लॉक के खानिमपुर कीपुष्पा के घर शौचालय तो नहीं बन पाया, अलबत्ता पंचायतीराज विभाग ने सोक पिट बनाने के लिए जो गड्ढा खोदा था उसमें उनकी भैंस गिरकर जरूर मर गई। इस घटना से आक्रोशित पुष्पा ने गड्ढा ही पटवा डाला। गड्ढा खुदने के पांच महीने बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं होने पर पुष्पा ही नहीं गांव के रमाकांत, भैरोनाथ समेत करीब आधा दर्जन और लाभार्थियों ने भी गुस्से में गड्ढा पाट डाला। एक लाभार्थी शिवचरन ने तो अब खुद के खर्च से निर्माण शुरू करा दिया है।
यह हाल तब है जब स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले के ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) होने की घोषणा एक साल पहले ही हो चुकी है। जिले में 2013 से अब तक करीब 5.30 लाख शौचालयों के निर्माण का दावा किया जाता है। यही नहीं, ओडीएफ घोषित होने के बाद भी दो बार सर्वे कराया गया जिसमें पहली बार 60 हजार और दूसरी बार करीब 20 हजार ऐसे लोग चिह्ति किए गए, जिनके पास शौचालय नहीं हैं। इन्हें भी शौचालय के लिए 12 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिए जा रहे हैं।
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कार्रवाई के बाद भी सुधार नहीं
शौचालय निर्माण को लेकर सचिव से लेकर एडीओ पंचायत तक गलत सूचनाएं देते हैं। खुद डीपीआरओ और सीडीओ खोराबार, खजनी, पिपरौली, कैंपियरगंज, गगहा आदि ब्लॉकों में निरीक्षण के दौरान शौचालय निर्माण में अनियमितता पकड़ चुके हैं। कई पर कार्रवाई भी हो चुकी है। बावजूद इसके अभी भी सही रिपोर्ट नहीं पहुंच रही।
गांव के लोग बोले:
घर के सामने महीनों से गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया था। एक दिन मेरी भैंस उस गड्ढे में गिर गई। किसी तरह उसे निकाला गया। डॉक्टर ने बताया, उसका कूल्हा टूट गया है। कई दिनों तक इलाज चला। काफी रुपया खर्च हो गया, मगर भैंस की जान नहीं बची । रकम जोड़कर किसी तरह भैंस खरीदी थी।- पुष्पा देवी, खानिमपुर, पिपरौली
सेक्रेटरी और प्रधान कहते हैं, आज पैसा मिल जाएगा, कल पैसा मिल जाएगा। महीनों गुजर गए और निर्माण नहीं शुरू हुआ तो थक हारकर खुद ही निर्माण शुरू करा दिया। प्रधान का कहना है कि निर्माण के बाद प्रोत्साहन राशि मिल जाएगी पर मुझे तो भरोसा कम ही है। - शिवचरन, खानिमपुर
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कोट
तमाम छूटे हुए लोगों के शौचालयों का भी निर्माण कराया जा रहा है। फंड मिलते ही प्रोत्साहन राशि वितरित कर दी जाती है। मामला संज्ञान में नहीं है। जांच कराई जाएगी। अगर महीनों से गड्ढा खोदकर छोड़ा गया है और निर्माण नहीं शुरू हो पाया तो दोषी लोगों पर कार्रवाई होगी। निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। - हिमांशु शेखर ठाकुर, डीपीआरओ
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