मगर वह फिर भाग निकला। थोड़ी ही देर बाद रात 11 बजे के करीब वह लामबंद होकर अपने समुदाय के युवकों के साथ लाठी डंडे और धारदार हथियार के साथ पहुंचा और किशोरी के परिवार पर जनलेवा हमला बोल दिया।
किशोरी व उसकी मां सहित पूरे परिवार को बुरी तरह से पीटा। धारदार हथियार के वार से मां के हाथ पर गहरे जख्म हो गए। शोर सुनकर मोहल्ले के लोग जुट गए।
इसपर गांववालों को भी दौड़ाकर-दौड़ाकर पीटा गया। एक बीमार दिव्यांग धर्मवीर को भी नहीं बख्शा गया। ट्राइसाइकिल से गिराकर उसे बेरहमी से पीटकर अधमरा कर दिया गया।
इतने से जी नहीं भरा तो पास के पार्क में घुसकर वहां लगी प्रतिमा को भी तोड़ दिया। एक घण्टे से अधिक समय तक चले तांडव के बाद पूरी बस्ती में चीख-पुकार मची रही। किसी तरह डायल 100 को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस भी असहाय दिखी। फोर्स पहुंचने के बाद अराजक तत्व मौके से भागे। वहीं सुबह एक बार फिर धमकी और गाली देने से माहौल बिगड़ गया।
सूचना पर एसओ गौरी बाजार फोर्स के साथ वहां पहुंचे। किसी तरह ग्रामीणों को समझा-बुझाकर थाने बुलाया। लेकिन जैसे ही मूर्ति ठीक कराने की बात गई तो ग्रामीण भड़क उठे। उनका कहना था कि पहले केस दर्ज कर आरोपियों पर कार्यवाई हो फिर वह मूर्ति बनवाएंगे।
इस तरह की जलालत वह बार-बार झेलते हैं और अब अजिज आ चुके हैं। पूरी बस्ती के लोग थाने पहुंचे। जानकारी के मुताबिक घटना में शीला देवी का हाथ कटा जबकि सरोज, प्रीति, सरिता, तेतरी, रामायण, जयप्रकाश, धर्मवीर (दिव्यांग) नारायण आदि सहित दो दर्जन के करीब लोग घायल हुए हैं।
छेड़खानी के शिकार परिवार ने बृहस्पतिवार को ही तहरीर दी थी मगर पुलिस ने ततपरता नहीं दिखाई। आरोप है कि इसीलिए दबंगों ने आगे बेखौफ होकर दूसरे दिन भी अपनी मनमानी करके घटना को अंजाम दिया। एसओ अरुण कुमार मौर्य ने बताया कि आरोपियों पर केस दर्ज कर छनबीन की जा रही है।