फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिटी मजिस्ट्रेट ने टेंडर फॉर्म बेचने से रोका 

Fri, 10 Jun 2016 09:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट में टेंडर फॉर्म बेचते नगर निगम कर्मचारी। - फोटो : rajesh kumar
विज्ञापन
डीएम ऑफिस में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम की तरफ से 91 कामों के लिए टेंडर फॉर्म बेचने की प्रक्रिया रोक दी। यही नहीं सिटी मजिस्ट्रेट ने कर्मचारियों सहित वहां मौजूद ठेकेदारों को कार्यालय से बाहर कर दिया। इसके बाद कर्मचारी नगर निगम लौट आए और इसकी जानकारी चीफ इंजीनियर और नगर आयुक्त को दी। नगर आयुक्त ने सिटी मजिस्ट्रेट से बात कर फॉर्म बेचे जाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक फॉर्म बेचा गया।
विज्ञापन


नगर निगम की तरफ से शुक्रवार को डीएम ऑफिस में 91 कामों के लिए टेंडर फॉर्म बेचे जा रहे थे। फार्म बेचने के लिए नगर निगम के लिपिक रिजवान, शमीम, अशोक उपाध्याय की ड्यूटी लगी थी। शहर में नाली, सड़क निर्माण का कार्य होना है। इसके टेंडर फॉर्म के लिए ठेकेदारों की भीड़ उमड़ी हुई थी। डीएम ऑफिस में फार्म बेचने की प्रक्रिया चल रही थी कि दोपहर साढ़े 12 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अभय कुमार मिश्र पहुंच गए।

उन्होंने कर्मचारियों से पूछा कि किसकी इजाजत से वह फॉर्म बेच रहे हैं। इसका जवाब निगम कर्मचारी नहीं दे सके, जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने फॉर्म बिकना रुकवा दिया। कर्मचारी फॉर्म लेकर नगर निगम लौट आए और चीफ इंजीनियर एसके केशरी को इसकी जानकारी दी। चीफ इंजीनियर ने नगर आयुक्त बीएन सिंह को अवगत कराया।
विज्ञापन


नगर आयुक्त ने सिटी मजिस्ट्रेट से बातचीत कर टेंडर फॉर्म डीएम ऑफिस पर बेचे जाने की जानकारी दी। इसके बाद दोपहर दो बजे से फॉर्म बेचे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि नगर निगम के इतिहास में पहली बार टेंडर फॉर्म शाम पांच बजे तक बेचा गया। 

टेंडर फॉर्म कई सालों से डीएम ऑफिस पर ही बेचा जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट ने शोर होने पर फॉर्म बेचने से रोक दिया था। नगर आयुक्त के बात करने के बाद फॉर्म नियमानुसार बेचा गया। 
विज्ञापन

- एसके केशरी, चीफ इंजीनियर 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें