देश की राजधानी दिल्ली से भले ही गांव सैकड़ों किलोमीटर दूर हो। मगर वहां पर बैठे अफसर प्रदेश के किसी भी ग्राम सभा में हुए विकास की मॉनिटरिंग कर सकेंगे। क्योंकि अब गांवों में जो काम होने जा रहा है उसकी जानकारी पंचायत महकमे को पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय को देने की बाध्यता है। इससे केंद्र सरकार की प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसी भी ग्राम सभा में हुए नाली, सड़क, खड़ंजा आदि विकास के कार्यों पर नजर रहेगी।
दरअसल गांव में मिट्टी पटान, तालाब की खुदाई, नाली जैसे छोटे-छोटे काम होते हैं। मौके पर जब इन कामों का सत्यापन किया जाता है तो अक्सर धरातल पर काम नहीं पाए जाते हैं। विकास कार्य की गुणवत्ता पर किसी की ठोस जवाबदेही नहीं होती। लिहाजा केंद्र सरकार ने 14 वें वित्त का बजट अब पंचायतों को जारी कर दिया है। इसके साथ ही शर्त रख दी है कि गांवों में विकास के जो भी काम होंगे उसकी पहले कार्ययोजना बनानी होगी। उसके बाद उसे पंचायत महकमे से स्वीकृत कराना होगा। वहां से कार्ययोजना जिलाधिकारी दफ्तर को जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी कार्ययोजना को मंजूर करेंगे। तत्पश्चात कार्ययोजना का पूरा ब्योरा पंचायत महकमा केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्लान प्लस साफ्टवेयर पर लोड करेगा।
इस तरह से पंचायतों में होने वाले प्रत्येक विकास कार्यों की जानकारी दिल्ली में बैठे हुए अफसरों को रहेगी और वह वहीं से गांवों के छोटे-छोटे विकास के कामों पर नजर रख सकेंगे।
गोरखपुर जिले में 1354 ग्राम पंचायतों में से 950 गांवों में होने वाले विकास कार्यों का ब्योरा ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार को दिया जा चुका है। 404 गांवों की कार्ययोजना का ब्योरा प्लान प्लस साफ्टवेयर एक सप्ताह के भीतर डाल दिया जाएगा।
छोटे-छोटे करीब 15 हजार काम है, जिनका ब्योरा ग्रामीण विकास मंत्रालय को देने के लिए शहर के कई कंप्यूटर सेंटरों को हायर किया गया है, जो युद्धस्तर पर मंत्रालय के साफ्टवेयर पर कार्ययोजना को लोड कर रहे हैं। एक हफ्ते के भीतर काम पूरा हो जाएगा।
आरके भारती, जिला पंचायत राज अधिकारी