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शीतल ने जिले में किया टॉप

Mon, 29 May 2017 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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पास होने पर खुशी मनाते मेधावी। - फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं का रिजल्ट देख होनहारों के चेहरे खिल उठे। मजबूत इरादों और बुलंद हौसले से मेधावियों ने कामयाबी की इबारत लिखी। ब्लॉसम सीनियर सेेकेंडरी स्कूल के शीतल गुप्ता ने 96.8 फीसदी अंक हासिल कर टॉपर बनने का गौरव हासिल किया तो आरपीएम एकेडमी, सिविल लाइंस की प्रज्ञा सिंह और जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल की सृष्टि शर्मा ने 96.6 फीसदी अंक पाकर दूसरे स्थान पर रहते हुए श्रेष्ठता साबित की।
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रविवार की सुबह करीब 11 बजे सीबीएसई की वेबसाइट पर रिजल्ट आया। साइबर कैफे में जहां भीड़ लगी रही वहीं बहुत से विद्यार्थियों ने मोबाइल पर ही रिजल्ट देख लिया। रविवार को एक बजे जैसे ही इंटरनेट पर रिजल्ट आया स्कूल, साइबर कैफे, घरों में रिजल्ट देखने में विद्यार्थी और अभिभावक जुट गए। रिजल्ट देखकर कई विद्यार्थियों में मायूसी छा गई, जिन्हें उम्मीद से कम अंक मिले, लेकिन जिन्होंने अपनी कक्षा या शहर में टाप कर नाम रोशन किया, उनके घर में जश्न का माहौल रहा। बच्चों की सफलता से मां-बाप काफी खुश नजर आए और आस पड़ोस के लोगों को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटीं। मोबाइल पर भी बधाई देने वालों को तांता लगा रहा।

सेल्फी खींचने की लगी रही होड़
स्कूलों में पहुंचे विद्यार्थियों ने पहले एक-दूसरे को कामयाबी की बधाई दी, इसके बाद उनमें सेल्फी लेने की होड़ मच गई। आरपीएफ एकेडमी, आर्मी स्कूल, जीएन नेशनल पब्लिक आदि स्कूलोें में पहुंचे विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों ने भी सेल्फी ली।  
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गुरुजनों का लिया आशीर्वाद 
शहर के कई स्कूलोें में मेधावियों को बुलाया गया था। विद्यार्थियों ने गुरुजनों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। स्कूल प्रबंधन ने उन्हें सफलता के लिए बधाई दी और मिठाई खिलाई। विद्यार्थी एक-दूसरे से मिलकर नंबर साझा करते रहे। साथियों का नंबर जानने के बाद वे अगली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर बात करने में मशगूल हो गए। आरपीएफ एकेडमी के डायरेक्टर अजय शाही विद्यार्थियों की सफलता से काफी उत्साहित थे। हर सफल विद्यार्थी को खुद फोन करके उन्होंने स्कूल बुलाया। उन्होंने सभी को व्यक्तिगत तौर पर सफलता के लिए बधाई दी और सुनहरे भविष्य की कामना की। वहीं आर्मी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य दीपिका अरोड़ा ने कॉलेज के टॉपर को बधाई दी। रैंपस स्कूल में पहुंचे बच्चों को प्रिंसिपल और शिक्षकों ने बधाई दी। एबीसी पब्लिक स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों को डायरेक्टर हेमंत मिश्रा ने मिठाई खिलाकर उत्साह बढ़ाया।

शाम को मंदिर में बढ़ गई भीड़
रिजल्ट आने के बाद शाम को मंदिरों में भीड़ बढ़ गई। गोलघर स्थित काली मंदिर, बेतिहायाता हनुमान मंदिर में बहुत से विद्यार्थी दर्शन करने पहुंचे। उनके साथ अभिभावकों ने भी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रार्थना की।
मुफलिसी में हौसले से छू लिया आसमान यदि मन में जज्बा हो तो घर की मुफलिसी या अन्य समस्याएं आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। इस बात को हकीकत में कर दिखाया हॉकर के पुत्र शीतल गुप्ता ने, जिन्होंने सीबीएसई बोर्ड में जिले में टॉप किया है। गोरखनाथ मोहल्ले के रहने वाले शीतल गुप्ता ने घर की मुफलिसी के बीच भी अपने बुलंद हौसले के बलबूते कामयाबी की नई इबारत लिख दी। उन्होंने न सिर्फ पिता के अरमानों को पूरा करने के लिए मजबूती से अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ाए हैं, बल्कि अपने स्कूल ब्लॉसम सीनियर एकेडमी के साथ ही जिले का टॉपर होने का गौरव भी हासिल किया है। अब उनका सपना इंजीनियर बनने का है। वे कहते हैं, भविष्य की राह अभी और मुश्किल हैं लेकिन इसके लिए मुझे और मेहनत करनी होगी। शीतल कहते हैं, मेरे पिता जी राम उग्रह गुप्ता सुबह अखबार बांटते हैं, इसी से घर का खर्च चलता है। बड़ी मुश्किल से उन्होंने कोचिंग के रुपये जुटाए। मुझे पता था कि पिता जी के अरमानों का आखिरी उम्मीद हूं। उनके विश्वास पर खरा उतरने के लिए कभी मैंने आत्मविश्वास नहीं खोया। बेहतर अंक लाने का जुनून मेरे अंदर था, रात में रोजाना तीन घंटे पढ़ता था। पेपर भी अच्छे हुए थे, 95 फीसदी तक अंक आने की उम्मीद थी। सुबह स्कूल के डायरेक्टर सर का फोन आया और उन्होेंने सबसे पहले बधाई दी। यह सुनकर मैं तो पहले आश्चर्यचकित था। मैंने मां को बताया तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। यह कहते-कहते शीतल भी भावुक हो गए। शीतल ने स्कूल जाकर गुरुओं की आशीर्वाद लिया और इसके बाद घर पहुंचे मित्रों के साथ खुशियां साझा की।
ट्यूशन नहीं ली, खुद पर रखा भरोसा दक्षिणी बेतियाहाता की रहने वाली मेधावी प्रज्ञा सिंह ने बगैर ट्यूशन की मदद लिए जिले में दूसरा स्थान हासिल कर साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य केंद्रित कर पढ़ाई की जाए तो मंजिल जरूर मिलेगी।  प्रज्ञा का सपना आईएएस अफसर बनना है। इसके लिए वह आगे की पढ़ाई बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से करना चाहती हैं। प्रज्ञा को घर पर पढ़ाई का पूरा माहौल मिला। उनके पिता डॉ प्रवीण सिंह डीवीएनपीजी कॉलेज में शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान उन्होंने बेटी का हौसला तो बढ़ाया ही ट्यूशन न कराकर तालीम में मदद भी की।
अपनी कामयाबी से गौरवान्वित प्रज्ञा कहती हैं, पापा ने उन्हें रिजल्ट की जानकारी दी। मुझे खुशी का ठिकाना नहंीं रहा। इसके बाद स्कूल आरपीएम एकेडमी से फोन आया कि सबसे ज्यादा अंक मुझे मिला है। पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। जो मैं चाहती थी वह सब कुछ सुनने को मिल रहा था। स्कूल पहुंची तो डायरेक्टर अजय शाही और प्रिंसिपल आराधना शाही ने चैंबर में बुलाकर बधाई दी। प्रज्ञा कहती हैं, वह नियमित स्कूल अटेंड करती थी, जब भी कोई उलझन होती थी तो उस पर स्कूल में सवाल-जवाब करती थी। घर पर पापा भी मदद करते थे। स्कूल और कोचिंग के बाद नियमित घर पर तीन से चार घंटे पढ़ती थी। गाना सुनना और घूमना उनका शौक है। अपनी कामयाबी का श्रेय प्रज्ञा माता-पिता, चाचा लालजी सिंह और शिक्षकों को देती हैं।
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