विधानसभा चुनाव के पहले बसपा में प्रत्याशियों को लिटमस टेस्ट से गुजरना होगा। पार्टी के कैडर कैंप और आजमगढ़ में 28 अगस्त को बसपा सुप्रीमो की होने वाली रैली प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगी। इस दौरान त्रिस्तरीय मॉनीटरिंग में पास होने वालों की प्रत्याशिता पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
पूर्वांचल में पहली चुनावी रैली का आगाज सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से कर बसपा सुप्रीमो मायावती जहां एक ओर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगी तो वहीं उनकी अति विश्वसनीय कैडर की टीम घोषित प्रत्याशियों की अब तक की तैयारी और दमदारी का भी आंकलन करेगी। पार्टी आलाकमान ने गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के सभी विधानसभाओं से घोषित प्रत्याशियों को पांच-पांच हजार लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया है। मदद के लिए पार्टी पदाधिकारियों को लगाया गया है।
सूत्रों की मानें तो भीड़ की सही स्थिति का पता लगाने के लिए पार्टी क्षत्रपों ने नई रणनीति बनाई है। रैली के एक दिन पहले यानी 27 अगस्त को हर विधानसभा क्षेत्र से ढाई हजार की भीड़ के साथ जिम्मेदारों को रैली स्थल पर पहुंचना है, जबकि ढाई हजार की भीड़ को साथ लेकर रैली के दिन प्रत्याशी पहुंचेंगे। पार्टी के जोनल कोआर्डिनेटर लालजी भारती ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र से पांच हजार की भीड़ निजी साधनों से रैली में लाना है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
कैडर कैंप की होगी अहम भूमिका
विधानसभाओं में कैडर कैंप की भूमिका प्रत्याशियों की दावेदारी बचाने में अहम होगी। हर विधानसभा में 10 बूथ को मिलाकर एक कैंप हो रहा है। कैंप में संगठन के लोग बूथ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से प्रत्याशियों की तैयारियों की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेज रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट के आधार पर जिले के दो से तीन प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।