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बेसिक शिक्षामंत्री ने सुनाई भ्रष्टाचार की दास्तान , बीएसए ने मुझसे भी मांगी थी 20 हजार घूस

Mon, 02 Sep 2019 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो विवेक सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी - फोटो : amar ujala
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी ने रविवार की देरशाम वैष्णवी लॉन में बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की कहानी सुनाई। एबीवीपी के कार्यक्रम में आए मंत्री ने अपनी गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भी भ्रष्टाचार के शिकार हुए थे।
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बीटीसी परीक्षा पास कर ली थी। साक्षात्कार के बाद प्राथमिक विद्यालय में नियुक्ति मिलनी थी। साक्षात्कार देने गए तो तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने 20 हजार रुपये घूस मांगी। बीएसए ने कहा कि जितने हजार रुपये दोगे, उतने नंबर मिलेंगे। अब बीएसए सेवा में नहीं हैं। यदि होते तो मंत्री बनते ही पहली कार्रवाई उनकी बर्खास्तगी का कर देता।

बेसिक शिक्षामंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का जिक्र किया। मंत्री ने कहा कि जब बीएसए ने रकम मांगी तो वह कुछ नहीं कर सके। एक मित्र जो अपने मामा की ज्वेलरी की दुकान पर काम करते थे, उन्होंने उस दुकान से अपनी गारंटी पर उधार रकम की व्यवस्था की। घोर गरीबी के चलते नौकरी के लिए परिवार का दबाव इतना था कि वह कुछ कर न सके। एक शिक्षक के माध्यम से रकम भिजवाई गई।
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शिक्षक ने उन रुपयों का इस्तेमाल अपने एक साथी शिक्षक का निलंबन वापस कराने के लिए कर लिया। इस कारण उन्हें प्राथमिक विद्यालय में नौकरी भी नहीं मिल पाई। इस घटना के बाद उन्होंने अपने परिवार से कहा कि अब वह किसी दबाव में नहीं आएंगे। पिता जी विवाह कराना चाहते थे पर उन्होंने कह दिया कि जब तक अपने पैर पर खड़े नहीं हो जाएंगे, वह विवाह नहीं करेंगे।

शिक्षामंत्री ने खुद को विद्यार्थी परिषद के गोत्र का बताते हुए भावुकता भरे कई पुराने संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सदानंद गुप्त ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. उमा श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही, डॉ. नितिन कुमार बख्शी, सिद्धार्थ शंकर पांडेय, सौरभ श्रीवास्तव, कृष्ण मूर्ती राय, आशुतोष त्रिपाठी, प्रवीण यादव, रामनाथ गुप्ता, नीरज शाही, संतोष राय, वरुण राय, नीतीश श्रीवास्तव, रवि प्रकाश मणि, कुमार गौरव, राहुल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ेंगे संपन्न परिवारों के बच्चे
मंत्री ने कहा कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग प्रदेश में ही नहीं देश में भी अपनी पहचान बनाए यह मेरा प्रयास होगा। अपने कार्यकाल में परिषदीय विद्यालयों की छवि ऐसी बना देंगे कि वहां सम्पन्न लोग भी अपने बच्चों को पढ़ाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालयों के 95 प्रतिशत शिक्षक किसी भी कारपोरेट विद्यालय के शिक्षकों से ज्यादा योग्य मेहनती और ईमानदार हैं लेकिन 20-30 सालों से सड़ रही व्यवस्था में खुद को मजबूर पाते हैं। 5 प्रतिशत गलत लोगों की वजह से पूरा विभाग बदनाम बना हुआ है।

मेरे पास तो पहनने का अपना जूता नहीं था
बेसिक शिक्षा मंत्री ने पुराने साथियों के बीच अपनी गरीबी की पृष्ठभूमि का विस्तार से जिक्र भी किया। विद्यार्थी जीवन में पहनने को जूता नहीं होता था। किसी के रिजेक्ट जूते में रुई डालकर काम चलाते थे। घर (सिद्धार्थनगर) से पढ़ने के लिए 150 रुपये मिलते थे। इसमें से 100 रुपये कमरे के किराए (गोरखपुर में रहकर पढ़े) में चले जाते थे। जेब खर्च के 50 रुपये बचते थे। 11 रुपये बचाकर रखते थे कि घर जाना होगा। गरीबी के उन दिनों को वह कभी भूल नहीं सकते। तब एबीवीपी के संगठन मंत्री हरीश ने मदद की थी। भोजन की निशुल्क व्यवस्था की। आवेदन फार्म भरा और असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए।
 
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कोई चपरासी बनाने को कह देता तो पिताजी खुश हो जाते थे

बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि पिता जी हर हाल में सरकारी नौकरी दिलवाना चाहते थे। आसपास के किसी स्कूल, कॉलेज के प्रधानाचार्य से चपरासी बनाने का ऑफर देते थे तो भी वह खुश होकर बताते थे। कहते थे कि जाकर नौकरी कर लो।

पुराने साथियों की जमकर की तारीफ
बेसिक शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थी परिषद और भाजपा संगठन में अपने पुराने साथी सिद्धार्थ शंकर पांडेय, क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, अमृतांशु, नितिन बख्शी सहित कई पदाधिकारियों की जमकर तारीफ की और उनके साथ अपने संस्मरणों का उल्लेख किया।
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