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कमीशनखोर पूर्व प्राचार्य घर छोड़कर भागे 

Wed, 23 Aug 2017 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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मेडिकल कॉलेज। - फोटो : Amar Ujala
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौतों के मामले में मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट और आरोपियों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर होने से हड़कंप मचा हुआ है। कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला घर छोड़कर भूमिगत हो गए हैं। उनके घर पर ताला लटका हुआ है। दोनों पर कमीशनबाजी के चक्कर में फाइल रोकने के आरोप लगे हैं। मुख्य सचिव ने जो जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दी गई है, उसका सीधा असर मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला है। कमीशनबाजी में शामिल कुछ चिकित्सक, कर्मचारियों का भी पता नहीं चल रहा हैं। सबको डर है कि एफआईआर के बाद गिरफ्तारी संभव है। 
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गोरखपुर पुलिस करेगी विवेचना
मेडिकल कॉलेज प्रकरण में लखनऊ के हजरतगंज थाने में केस दर्ज कर विवेचना के लिए केस गोरखपुर ट्रांसफर हो जाएगा। इसकी विवेचना गोरखपुर पुलिस ही करेगी। सीओ हजरतगंज अभय मिश्रा ने बताया कि तीन तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर विवेचना के लिए केस गोरखपुर संबंधित थाने में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार अधिनियम, गैर इरादतन हत्या और प्राइवेट प्रैक्टिस करने के धाराओं में केस दर्ज हुआ है।  

‘नैतिकता’ में पद छोड़ा पर कोठी नहीं
निलंबन के बाद ‘नैतिकता’ की दुहाई देकर इस्तीफा देने वाले पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र हालांकि फरार हैं, मगर कॉलेज परिसर के सरकारी आवास पर अब भी कब्जा जमाए हुए हैं। उनकी जगह आए प्रिंसिपल गेस्ट हाउस में रहकर कामकाज निपटा रहे हैं। 
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निशाने पर पूर्व प्रिंसिपल सहित छह 
डीएम के बाद मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट में भी पूर्व प्राचार्य की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। घटना के समय वह बाहर थे, जिसकी सूचना डीएम को नहीं थी। एनेस्थीसिया के डॉक्टर और पर्चेज कमेटी के मुखिया डॉ. सतीश भी मुख्यालय पर नहीं थे। इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल प्रभारी रहे डॉ. कफील खान को भी लापरवाह बताया गया है। रिपोर्ट में लेखाकार उदय प्रताप शर्मा, संजय त्रिपाठी और सतीश कुमार पांडेय की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। 

कई हिस्सों में बंटता है कमीशन
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों की माने तो कमीशन कई हिस्सों में बंटता है। दवाएं, उपकरण हो या फिर ऑक्सीजन बिल बिना कमीशन के नहीं होता। छोटे से लेकर बड़े और लखनऊ में बैठे कुछ लोग भी कमीशन के खेल का हिस्सा होते हैं। इसी का नतीजा है किनिचले स्तर पर चाहकर भी कोई काम नहीं हो पाता। ऑक्सीजन की फाइल इसी चक्कर में फंसी थी। 

मीडिया का ध्यान बंटने से राहत
बाढ़ के चलते मीडिया का ध्यान हादसे से हटने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन राहत महसूस कर रहा है। वहीं हादसे पर सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को घेर रहे विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों का भी ध्यान बाढ़ की ओर चला गया है। इससे मेडिकल कॉलेज प्रशासन के जिम्मेदारों पर मामले को लेकर चल रहा मनोवैज्ञानिक दबाव कम हो गया है। 
डॉ. कफील का ‘सच’ वायरल
मेडिकल कॉलेज में एनआरएचएम के नोडल अफसर रहे इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान कार्रवाई के बाद से ही सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर एक ओर कुछ लोग उन्हें ‘मसीहा’ साबित करने पर तुले हैं तो दूसरी ओर ऐसे भी संदेश खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें डॉ. कफील खान का दूसरा रूप नजर आ रहा है। अभिनेत्री विद्या बालन पर अश्लील ट्वीट से लेकर क्लीनिक पर 24 घंटे सेवा देने का उनका विज्ञापन भी खूब वायरल हो रहा है। हालांकि, डॉ. कफील ने कार्रवाई के बाद अपने ट्वीटर अकाउंट की सेटिंग प्राइवेट कर ली है। इसके बाद भी पूर्व में लिए गए उनके ट्वीट के स्क्रीन शॉट अब भी फैल रहे हैं। सोशल मीडिया पर डॉ. कफील के साथ पूर्व डीजीपी जावीद अहमद और सपा के बड़े नेताओं के साथ फोटो भी वायरल है। इन्हें लेकर जब मेडिकल कॉलेज में लोगों से बात की गई तो पता चला कि पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा भी डॉ. कफील के रसूख से खौफ खाते थे। कॉलेज में इस बात की चर्चा है कि आजम खान से नजदीकी के चलते पूर्ववर्ती सरकार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया। उस समय वार्ड की अव्यवस्था या इससे जुड़ी अनियमितता की शिकायतों पर प्राचार्य बैकफुट पर आ जाते थे। सूत्रों की माने तो प्राचार्य यहां तक कहते थे कि डॉ. कफील अगर बिदके तो उनकी कुर्सी भी खतरे में पड़ जाएगी।

रेप केस में फाइनल रिपोर्ट पर भी सवाल
पूर्व डीजीपी जावीद अहमद के साथ सोशल मीडिया पर वायरल फोटो को डॉ. कफील पर दर्ज रेप केस में फाइनल रिपोर्ट लगने का कारण बताया गया है। इसमें डॉॅ. कफील और जावीद अहमद के नजदीकी रिश्ते का जिक्र करते हुए पुलिस की जांच पर सवाल उठाया गया है। कहा गया है कि इसी के चलते मामले में जांच अधिकारी ने एफआर लगा दी और पीड़ित युवती न्याय से महरूम रह गई।
 
बीआरडी हादसे के बाद डॉ. कफील ‘बीमार’ 
ऑक्सीजन संकट के दौरान हुई मासूमों की मौतों को लेकर माहौल गर्माया तो डॉ. कफील ‘बीमार’ हो गए। सीएम के दौरे के बाद से डॉ. कफील मेडिकल कॉलेज में नजर नहीं आए हैं। न तो वह आईएमए की जांच के दौरान बयान दर्ज कराने पहुंचे और न ही उच्च स्तरीय समिति की जांच के दौरान कॉलेज परिसर में नजर आए थे।
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