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जज्बे को मिली ताकत तो हौसलों ने भरी उड़ान

Fri, 07 Oct 2016 09:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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नारी सम्‍मान कार्यक्रम में महिलाओं को सम्मानित किया गया। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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‘नसीबों के साख पर खिलती है बेटी, तकदीर भली हो तो मिलती है बेटी’ जिले की महिला डीएम संध्या तिवारी ने जैसे ही इस शेर के साथ महिलाओं की हौसलाफजाई की, गोरखपुर यूनिवर्सिटी का प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा। तालियाें की यह गूंज किसी शेर पर दाद नहीं थी बल्कि नारी शक्ति का अहसास थी। इस अहसास का अवसर दिया था अमर उजाला और प्रदेश सरकार की साझा मुहिम के तहत होने वाले संगोष्ठी और महिला सम्मान समारोह ने।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन के प्रेक्षागृह में शुक्रवार को हुए इस कार्यक्रम में शहर की उन चुनिंदा महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने जुनून और हौसले से समाज सेवा, उद्यमिता, खेल, कला, बहादुरी और शिक्षा के क्षेत्र में न केवल पहचान बनाई है बल्कि कइयों के लिए नजीर भी बनीं। मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप जलाने और स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो सबसे पहले संचालक रीता श्रीवास्तव ने एसएसपी रामलाल वर्मा को संबोधन के लिए आमंत्रित किया। एसएसपी ने प्रदेश सरकार की ओर से नारियों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे 1090, आशा ज्योति केंद्र और जल्द शुरू होने वाले डायल 100 की विस्तार से जानकारी दी। डीएम संध्या तिवारी ने महिलाओं से समाजवादी पेंशन, लोहिया आवास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

डीआईजी शिवसागर सिंह ने शेर पढ़कर महिलाओं की हौसलाफजाई की और कहा कि बेटी को योग्य बनाने को वे अभियान माने। उन्होंने मौजूद महिलाओं से इसे लेकर हामी भी भरवाई। समापन संबोधन में कमिश्नर अनिल कुमार ने कहा कि महिलाएं समाज में रंग भरने का कार्य करती हैं। ऐसे में उनकी हिफाजत सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे लेकर दुख व्यक्त किया कि एक तरफ तो हम नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं पर दूसरी तरफ महिलाओं के साथ तमाम तरह की शर्मनाक घटनाएं घटती रहती हैं। समारोह में एक हाथ से विकलांग छात्रा नूर अफसां ने अपने हाथ का बना टेबल क्लाथ डीएम को भेंट किया तो सभी ने उसके जज्बे को सलाम किया। गीत और नाटक देख भावुक हुआ माहौल गोरखपुर। कार्यक्रम के दौरान सिद्धार्थनगर के आदर्श पब्लिक स्कूल महापाली चौराहे की छात्रा सौम्या पांडेय व महिमा पांडेय ने जब ‘बेटी कोख से बोल रही, मां कर दे मुझ पर उपकार, मत मार मुझे जीवन दे दे, मुझको भी दिखा दे संसार...’ गीत से कन्या भ्रूण हत्या की अन्तर्वेदना सुनाई तो गीत के एक-एक शब्द लोगों के दिल में तीर की तरह चुभे। माहौल को भावुक करने की रही-सही कसर सिद्धार्थनगर के विवेकानंद इंटर कॉलेज की छात्राओं ने ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ नाटक की प्रस्तुति से कर दी। इसमें महिलाओं के साथ समाज में हो रहे दुर्व्यवहार को उकेरते हुए शिक्षा की अलख जगाई गई। छात्रा सुष्मिता जायसवाल, प्रीति जायसवाल, सृष्टि कसौधन, उषा कसौधन, आरती गुप्ता, माला गुप्ता, सिमरन, मनीषा गौड़, उषा रानी की बेहतरीन प्रस्तुति को सभी ने सराहा। प्रस्तुति करने वाली सभी छात्राओं को अमर उजाला की ओर से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी की एनएसएस इकाई का भी सहयोग रहा।
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इनका हुआ सम्मान श्रेणी - सामाजिक कार्य 
नाम - शिप्रा मैसी
विशेषता व संदेश : शिक्षा के अभाव को दूर करके तमाम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। इनके प्रयास से आज दर्जनों घरों के चूल्हे जल रहे हैं। शिप्रा का कहना है कि महिलाओं को मार्गदर्शन मिले तो वो कुछ भी कर सकती हैं। मैंने उन्हें मार्गदर्शन देकर आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है। 

श्रेणी : उद्यमिता
नाम : प्रमिला मोदी
विशेषता व संदेश : 500 रुपये उधार लेकर व्यवसाय की शुरुआत की और आज इनका व्यवसाय लाखों में पहुंच गया है। सिर्फ इतना ही नहीं अपने इस व्यवसाय से 200 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया। प्रमिला कहती हैं कि नारी जब दो कुल चला सकती है तो उद्यम क्या चीज है। 

श्रेणी : कला
नाम : डॉ. निशा जायसवाल
विशेषता व संदेश : बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के मिनिएचर आर्ट में अपनी विशिष्ट शैली विकसित की। इनकी प्रतिभा के चलते इंडिया आर्ट फेस्टिवल में इन्हें ‘माइक्रो मिनिएचर्स’ नाम दिया गया। डॉ. निशा कुछ कर गुजरने के लिए महिलाओं को मनोबल ऊंचा रखने की सलाह देती हैं। 

श्रेणी : खेल
नाम : प्रीति दुबे
विशेषता व संदेश : रियो ओलंपिक 2016 में हॉकी टीम के साथ देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं प्रीति दुबे अब शहर की पहचान हैं। साउथ एशियन गेम्स वोमेन- 2016 में प्रीति को गोल्ड मेडल भी हासिल हो चुका है। कैंप के लिए भोपाल में डटीं प्रीति मानती हैं कि महिला होना कमजोरी नहीं है। 

श्रेणी : शिक्षा 
नाम : मंजूषा सिंह
विशेषता व संदेश : विद्यालय में शिक्षण के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सार्थक प्रयास किया। इनके शिक्षणेतर कार्यों से विद्यालय में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना, जो बच्चों के बहुमुखी विकास के लिए बेहद जरूरी है। मंजूषा कहती हैं कि अगर जज्बा है तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं। 

श्रेणी : बहादुरी
नाम : श्वेता मिश्रा
विशेषता व संदेश : दो लुटेरों को पकड़वाकर अपराध और अन्याय के खिलाफ बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं। इसके चलते उन्हें कई स्थानों पर सम्मानित किया गया। श्वेता का हर बेटी को यही संदेश है कि झंझावातों से डरें नहीं बल्कि उसका डटकर मुकाबला करें। बेटी होने का पश्चाताप न करें।

दृष्टिकोण बदलने की जरूरत
बेटियों में किसी तरह की हीन भावना न पनपे, इसके लिए सभी को प्रयास करते रहना चाहिए। बेटियां कभी बेटों से पीछे नहीं नजर आएंगी यदि उन्हें अवसर दिया जाए तो। सभी से अनुरोध है कि वे महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें। शिक्षित महिलाएं अपना सम्मान खुद-ब-खुद हासिल कर लेंगी। 
- शिवसागर सिंह, डीआईजी

शिकायत के बजाय हिम्मत बढ़ाएं
घरेलू हिंसा अधिनियम के लागू हो जाने के बाद से किसी महिला को उसके घर में न तो प्रताड़ित किया जा सकता है और न ही निकाला जा सकता है। यह ऐसी सुरक्षा है जो महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करती है। सुरक्षा की ताकत से महिलाएं शिकायत करने के बजाय खुद की हिम्मत बढ़ाएं।
- संध्या तिवारी, डीएम

सामाजिक विरोधाभास दूर करना होगा
यूएसए जैसे विकसित देश में अभी तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं हो सकी हैं, जबकि हमारे देश में यह अवसर एक महिला को मिल चुका है। इसी का दूसरा पहलू यह है कि आए दिन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आते रहे हैं। इस सामाजिक विरोधाभास को हर हाल में दूर करना होगा। 
- अनिल कुमार, कमिश्नर 

महिलाओं को आगे आना होगा
अक्सर थानों पर यह स्थिति देखने में आती है जब एक महिला ही महिला के खिलाफ आरोप लगाती है। सास-बहू के प्रकरण में अक्सर ऐसा होता है। अगर सास अपनी बहू को बेटी की और बेटी अपनी सास को मां की नजर से देखे तो ऐसे मामले स्वत: कम हो जाएंगे। इसके लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। 
- रामलाल वर्मा, एसएसपी

10 पुत्रों के समान है एक बेटी
जीवन से मिले अनुभव से मेरा मानना है कि यदि इंसान को बेटा भाग्य से मिलता है तो बेटियां सौभाग्य से मिलती हैं। जीवन के हर क्षेत्र में अपने कार्य से बेटियों ने यह सिद्ध किया है और लगातार कर रही हैं। दरअसल बेटियों की जो हमारी जीवन में भूमिका है, वह 10 बेटे मिलकर भी पूरी नहीं कर सकते। 
- प्रो. अजय कुमार शुक्ल, एनएसएस समन्वयक, गोरखपुर यूनिवर्सिटी

अपने घर का मिला सुख
लोहिया आवास मिला तो अपने घर का सुख हासिल हुआ वरना लगता था कि पूरा जीवन अस्थाई झोपड़ी में ही गुजर जाएगा। इसके लिए सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद। 
- गीता, लाभार्थी, लोहिया आवास

पेंशन ने दिया जीने का सहारा
पैसे-पैसे को मोहताज रहती थी। बिना पैसे के लगता था कि जीवन का कोई मतलब नहीं। समाजवादी पेंशन के मिल जाने के बाद तो लगा कि जीवन का सहारा मिल गया। 
- उर्मिला देवी, लाभार्थी, समाजवादी पेंशन

स्थायी घर में बदल गई झोपड़ी
मेरा परिवार झोपड़ी में रहता था। यह उम्मीद खो चुकी थी कभी अपना स्थायी घर होगा। लोहिया आवास योजना ने यह शिकायत दूर की। आज झोपड़ी स्थायी घर में बदल चुकी है।
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- कलावती, लाभार्थी, लोहिया आवास
 
घर मिला तो सब मिला
चिड़िया भी अपना घोसला बनाकर रहती है, ऐसे में इंसान से तो यह उम्मीद की जा सकती है कि वह अपना घर जरूर बनाए। सरकार ने यह अरमान पूरा कर दिया। 
- अमीना खातून, लाभार्थी, लोहिया आवास
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