वाणिज्य कर विभाग में सहायक कमिश्नर और वकील शशिकांत मिश्रा के बीच हुए विवाद के बाद बुधवार को अधिकारी, कर्मचारी और वकील आंदोलन की रणनीति बनाते रहे। मंगलवार की देर रात अधिवक्ता की तहरीर पर जहां मारपीट, जान से मानने की धमकी, भ्रष्टाचार निवारण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था वहीं बुधवार को सहायक कमिश्नर की तहरीर पर लोकसेवक से अभद्रता, सरकारी काम में बाधा और एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वकीलों ने धरना देकर कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारियों व कर्मचारियों ने डिप्टी कमिश्नर प्रशासन अमित पाठक की अध्यक्षता में बैठक की। इसमें तय हुआ कि सभी अधिकारी और कर्मचारी पहले की तरह काली पट्टी बांधकर काम करते रहेंगे। वहीं एक अधिकारी की ओर से 18 जनवरी 2006 में हुए विवाद का पत्र दिखाया गया। इसमें अधिवक्ता शशिकांत मिश्रा से ही कर्मचारियों का विवाद हुआ था तब अधिवक्ता संघ और कर्मचारी संघ के बीच समझौता हुआ था।
इसके तहत वकील शशिकांत ने सुझाव देते हुए कहा था कि कभी किसी कर्मचारी से विवाद नहीं करेंगे और कोई विवाद उत्पन्न होने की स्थिति होती है तो खंडाधिकारी, ज्वाइंट कमिश्नर एवं अधिवक्ता संघ को अवगत कराएंगे। इस पत्र का हवाला देते हुए बार कौंसिल को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता को समाप्त करने की मांग की गई है। उधर वकीलों ने टैक्स एडवोकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों की अगुवाई में वाणिज्य कर गेट पर धरना दिया। धरने की सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे और उनका मांगपत्र लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
डीएम व एसएसपी से मिले अधिकारी
विवाद को लेकर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने डीएम और एसएसपी से मुलाकात कर सुरक्षा की मांग की है। ताकि आने वाले व्यापारियों को अधिवक्ता काम कराने से न रोक सकें।
सहायक कमिश्नर विनय गुप्ता और प्रमोद कुमार से जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। घटना की जानकारी लिखित रूप से सहायक कमिश्नर विनय गुप्ता की ओर से दी गई है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अधिकारी काम करेंगे और सुरक्षा की मांग की है, ताकि व्यापारियों को कोई दिक्कत न होने पाए।
-अमित पाठक, डिप्टी कमिश्नर, प्रशासन