महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर रविवार को शहर में विभिन्न संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर वक्ताओं नेे उन्हें आधुनिक भारत का निर्माणकर्ता बताते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने की शपथ ली।
सनातन ब्रह्म सभा के तत्वावधान में गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में भारतरत्न पं. मदन मोहन मालवीय की जयंती के उपलक्ष्य में गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने पंडित मालवीय को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताया। कहा कि वह न सिर्फ एक कुशल शिक्षक थे बल्कि निपुण विधिवेत्ता भी थे। सफल पत्रकार और कुशल राजनीतिज्ञ के तौर पर भी उन्होंने ख्याति बटोरी। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि कांग्रेस ने उन्हें चार बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। रविंद्र नाथ टैगोर ने उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें महामना की उपाधि दी। गोष्ठी को प्रमुख रूप से प्रो. प्रभाशंकर पांडेय, प्रो. राजा वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. एसके दीक्षित, प्रो. चंद्रभूषण झा, प्रो. आरपी सिंह, डॉ. एसपी त्रिपाठी, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. धर्मव्रत तिवारी, पीके पांडेय, आरडी चतुर्वेदी आदि ने संबोधित किया।
ब्राह्मण एकता मंच ने महामना की जयंती एवं अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मनाया। प्रफुल्ल पांडेय ने कहा कि समाज इन दोनों महापुरुषों का ऋणी रहेगा। मंच के संरक्षक रत्नेश पांडेय, बादल चतुर्वेदी, राहुल चौबे, मनीष मिश्र, गौतम पांडेय, निहाल, कृष्णा पांडेय, हरे कृष्ण पांडेय आदि ने संबोधित किया। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में महामना की जयंती पर उनकी प्रतिमा का माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन हुआ। प्रभारी कुलपति डॉ. उदयशंकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस मौके पर सभी विभागाध्यक्ष, डीन, कर्मचारी मौजूद रहे।
अयोध्या दास स्काउट कुटीर में महामना की जयंती मनाई गई। जिला मुख्यायुक्त रामजन्म सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने महामना के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। जिला सचिव डॉ. दिनेश मणि ने अतिथियों का स्वागत किया। जिला कमिश्नर स्काउट गाइड श्रीनिवास शुक्ल, सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त सुरेश प्रसाद तिवारी आदि ने महामना के जीवन पर प्रकाश डाला। संचालन राजेश चंद्र ने किया। इस मौके पर कोषाध्यक्ष श्रीनारायण सिंह, बलराम शुक्ल, रामनाथ गुप्त, इशरत सिद्दीकी, किरन देवी, मंजू श्रीवास्तव आदि मौजूद थीं।