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‘बायोफ्यूल भविष्य में प्रभावी ईंधन होगा’

Sun, 22 Jan 2017 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सेमिनार का आयोजन किया गया। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वनस्पति विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शनिवार को ‘कम प्रयुक्त पौधे, खाद्य सुरक्षा एवं जलवायु कड़ी’ विषय पर वनस्पति विज्ञान विभाग में कम इस्तेमाल किए जाने वाले पौधों के महत्व पर कई नई जानकारियां सामने आईं। व्याख्यान की शुरुआत अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के प्रो. जीसी पांडेय ने की। ‘हरित ऊर्जा : पर्यावरण रक्षक’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल भविष्य में प्रभावी ईंधन होगा। आज वैज्ञानिकों ने ऐसे तमाम वनस्पतियां खोज ली हैं, जिनसे बायोफ्यूल हासिल किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि जहां पेट्रोल और डीजल से प्रदूषण होता है, वहीं बायोफ्यूल पर्यावरण के अनुकूल है। प्रो. पांडेय ने इसके प्रचार-प्रसार के साथ राष्ट्रीय स्तर पर शोध केंद्र स्थापित करने पर जोर दिया। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नालॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दिनेश यादव ने वर्तमान में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए कृषि जैव तकनीक के उपयोग की बात कही। कहा कि इसके जरिए रोग और सूखा-बाढ़ जैसी स्थिति के खिलाफ पौधों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करके भरपूर उत्पादन हासिल किया जा सकता है। भारतीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. मृदुल शुक्ल ने वनस्पतियों के जरिए गंगा के शुद्धीकरण का उपाय सुझाया।

मुख्य अतिथि बीएचयू के प्रो. एनके दुबे ने संगोष्ठी के जरिए प्रकाश में आए तथ्यों को शोध संस्थानों समेत भारत सरकार को भेजने की बात कही। संयोजक वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी शुक्ल ने नीति निर्माताओं तक संगोष्ठी का सार भेजने का आश्वासन दिया। सिक्किम यूनिवर्सिटी की डॉ. सुजाता उपाध्याय, मिजोरम यूनिवर्सिटी के अवधेश कुमार समेत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थ्यों ने अपने शोध पत्र पढ़े। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. वीएन पांडेय ने किया। इस मौके पर प्रो. राजेंद्र सिंह, प्रो. मालविका श्रीवास्तव, प्रो. वीएन पांडेय, प्रो. पूजा सिंह, यूपीएफआर के डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रो. केशव सिह, प्रो. चित्तरंजन मिश्र, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, डॉ. पीएच पाठक, डॉ. पुष्पेंद्र मिश्र, डॉ. अनूप द्विवेदी, डॉ. दुर्गेश दुबे, डॉ. जयेंद्र, ऋचा श्रीवास्तव, स्नेहा सिंह, डॉ. सुमित, सर्वेश आदि मौजूद थे।
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अनुपयोगी वनस्पतियों में भी कमाल के गुण
हिमांचल सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रो. प्रदीप कुमार और प्रो. मधु कामले का गोरखपुर से गहरा नाता है। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल होने पहुंचे इस दंपती ने जिमनोप्टेलम (देशज बोली में कउवा जाउर) के औषधीय गुणों पर शोध की है। संगोष्ठी के दौरान आयोजित पोस्टर प्रेजेंटेशन में इसी शहर में पैदा हुए प्रो. प्रदीप कुमार यहां झाड़-झंखाड़ में उगने वाले इस पौधे के मेथेनाल एक्सट्रैक्ट को डायरिया, कालरा समेत श्वसन एवं चर्म संबंधी बीमारियों के खिलाफ असरदार बताया। दोनों ने बताया कि शोध में सामने आए निष्कर्षों के मुताबिक भविष्य में इस अनुपयोगी से लगने वाले पौधे से लाभकारी दवाओं का निर्माण किया जा सकेगा।
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