समारोह में डाक्टरों को मेयर डा.सत्या पाण्डेय ने सम्मानित किया।
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होम्या फ्रेंड्स संस्था के तत्वाधान में रविवार को स्थानीय एक होटल में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सांसद शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि होम्योपैथिक दवाएं कई ऐसी बीमारियों पर भी कारगर है जिसमें एलोपैथिक दवाएं भी ठीक से काम नहीं कर पाती। सबसे बड़ी बात यह है कि इन दवाओं का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
ग्वालियर की डॉ. सपना गुप्ता ने बताया कि किशोरियों के चेहरे पर मुंहासे को गंभीरता से लेना चाहिए। इसे सिर्फ चेहरे की खूबसूरती ही नहीं बिगड़ती बल्कि बांझपन का भी संकेत है। मुंहासे यदि दवाएं से ठीक नहीं हो रहे हैं तो फिर बांझपन हो सकता है। इसे विज्ञान की भाषा में पॉलिस्टिक ओवेरियल सिंड्रोम कहते हैं। इस बीमारी में अंडाशय के अंदर गांठों का गुच्छा बन जाता है। शादी के बाद ऐसी लड़कियां मां नहीं बन पाती है। बांझपन के करीब 70 फीसदी मामलों में यही बीमारी सामने आती है।
गुजरात की डॉ. हेमा पारिख ने बताया कि मां यदि तनाव ग्रस्त हो तो बच्चे को सेरेब्रल पल्सी बीमारी हो सकती है। इसका दूसरा कारण बच्चेदानी का पानी सूखने, गर्भवती के तनाव में रहने या बच्चे के जन्म के बाद देरी से रोना भी होता है। इसमें बच्चे का विकास सामान्य बच्चे से कम होता है। अभिभावक इसका ध्यान नहीं देते हैं मगर यह आगे चलकर दिक्कत करने लगता है। इसका भी होम्योपैथिक में सटीक इलाज मौजूद है।
सेमिनार में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होम्योपैथिक चिकित्सक आए थे। डॉ. एमपी सिंह, डॉ. मनोज गुप्ता, डॉ. संदीप कैलाश, डॉ. प्रवीण त्रिपाठी, डॉ. रूप कुमार बनर्जी आदि उपस्थित थे।