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काउंसिलिंग में अटकीं प्रबंधन की सांसें

Thu, 23 Jun 2016 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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डिग्री कॉलेज
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बिना एनओसी मान्यता हासिल करने के दोषी 15 बीएड कॉलेजों की बात हाईकोर्ट तक पहुंच तो गई लेकिन सुनवाई के बाद फैसले का सुरक्षित हो जाना इन कॉलेजों के लिए समस्या का सबब बन गया है। कॉलेज प्रबंधन की सांसें इसलिए अटक गई हैं कि यदि यह फैसला चल रही बीएड काउंसिलिंग पूरा होने के बाद आया तो पक्ष में होने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे में पूरा प्रयास ही बेमानी साबित हो जाएगा।
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बिना एनओसी एनसीटीई से मान्यता ले लेने वाले 41 कॉलेजों को जब गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने संबद्धता देने से इन्कार कर दिया तो उनमें से एक स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज के प्रबंधन ने हाईकोर्ट की शरण ली। कॉलेज प्रबंधन की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उसे राहत देते हुए यूनिवर्सिटी को निर्देशित किया कि संबंधित कॉलेज को 2016-17 की बीएड काउंसिलिंग में शामिल करने की अनुमति दे। हालांकि अभी तक यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट के निर्देश को विधिक सलाह के नाम पर अमल नहीं किया है लेकिन एक कॉलेज को राहत मिलती देख 15 और कॉलेज प्रबधंन हाईकोर्ट पहुंच गए, लेकिन इस बार मामला फंस गया।

हाईकोर्ट ने 13 जून को यूनिवर्सिटी को अपना पक्ष रखने को कहा। यूनिवर्सिटी का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। ऐसे में पक्ष में तत्काल फैसले की याची कॉलेजों की उम्मीद पर पानी फिर गया। कॉलेजों की समस्या यह है कि चल रही बीएड काउंसिलिंग प्रक्रिया 25 जून को समाप्त हो जाएगी, ऐसे में यदि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आ भी जाता है तो भी वे इस बार काउंसिलिंग में वे हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
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पूल काउंसिलिंग का ही दिख रहा सहारा
गोरखपुर। 25 जून को बीएड काउंसिलिंग प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। ऐसे में यदि हाईकोर्ट का फैसला कॉलेजों के पक्ष में आता भी है तो उन्हें पूल काउंसिलिंग की राह देखने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा। पूल काउंसिलिंग होगी या नहीं और यदि हुई तो भी उससे इन कॉलेजों की सीटें भरेंगी या नहीं, यह सवाल कॉलेज प्रबंधन को सता रहा है।
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