ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार मंगलवार को मंगलवार को रवायती तरीके से हर्ष और उल्लास के वातावरण में मनाया गया। तय समय पर ईदगाहों व मस्जिदों में अकीदतमंदों ने नमाज अदा की और खुदा से अमन की दुआएं मांगी। उसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ जो सूर्य डूबने तक चला। कुर्बानी अगले दो दिन तक चलती रहेगी।
अलसुबह अदा की जाने वाली ईद-उल-अजहा की नमाज के लिए लोग तैयार होने लगे। लोगों ने साफ-सुथरे कपड़े पहने, इत्र लगाया, टोपी पहनी और पास के मस्जिद और ईदगाहों की ओर चल पड़े। वहां जानमाज बिछाई और नमाज का इंतजार शुरू। तय समय होते ही लोगों की जुबां पर तकबीर-ए-तशरीक की सदाएं थीं। इस दौरान लोगाें ने इमाम की तकरीरें ध्यान से सुनीं। ईदगाह मुबारक खां शहीद में मौलाना फैजुल्लाह कादरी, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद, रहमतनगर जामा मस्जिद में मौलाना अली अहमद ने तकरीर की। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में मोहम्मद सरफुद्दीन ने नमाज पढ़ाई। ईदगाह बेनीगंज, ईदगाह इमामबाड़ा एस्टेट, ईदगाह चिलमापुर, ईदगाह पुलिस लाइन, शाही जामा मस्जिद उर्दू बाजार सहित शहर 200 से अधिक मस्जिदों में नमाज अदा की गई और तकरीरों में कुर्बानी के फजाइल बयां किए गए। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिले और फिर ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी। ईदी भी बंटी, जिसे पाकर बच्चे खुश हुए। शाम से मेहमाननवाजी का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा।
दो दर्जन जगहों पर हुई सामूहिक कुर्बानी
गोरखपुर। घरों के अलावा दो दर्जन स्थानों पर सामूहिक कुर्बानी का आयोजन किया गया। कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए गए। लोगों ने एक हिस्सा खुद लिया, दूसरा दोस्त, अहबाब व पड़ोसियों में और तीसरा गरीबों व यतीमों में बांटा। चमड़ा मदरसों को सदका किया गया। सामूहिक कुर्बानीगाहों पर दूर-दूर से आने वाले लोगों का तांता लगा रहा।