इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों को जरा सी जागरूकता से कम किया जा सकता है। थोड़ा ध्यान रखा जाए तो इस बीमारी से दम तोड़ने वाले 60 फीसदी मासूमों की जान बचाई जा सकती है। ये उपयोगी जानकारी चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण दफ्तर में तैनात जनजागरूकता प्रभारी और गोरखपुर मंडल के संयोजक डॉ. वीके श्रीवास्तव ने दी।
उन्होंने बताया कि इंसेफेलाइटिस में मरीज के दिमाग पर असर पड़ता है। दिमाग में सूजन आने से झटके आते हैं। मरीज बेहोश हो जाता है। इसी दौरान एक छोटी सी चूक जानलेवा बन जाती है। अगर बेहोश मरीज की अस्पताल ले जाने तक देखभाल ठीक ढंग से हो तो 60 फीसदी मामलों में मौत टाली जा सकती है। अधिकतर मामलों में सामने आता है कि बेहोश मरीज को गलत तरीके से लेटाना उसकी मौत का सबब बन जाता है। दरअसल, इस दौरान मरीज को उल्टी आती रहती है। बेहोश होने से उल्टी बाहर नहीं निकल पाती और गलत तरीके में लेटाने से उल्टी आहार नली से निकलकर स्वांस नली में चली जाती है। इससे मरीज सांस नहीं ले पाता और उसकी मौत हो जाती है।
इसका रखें ध्यान तो बचेगी जान
- मरीज के बेहोश होने पर उसे पीठ के बल नहीं बाएं करवट लिटाएं
- बाएं हाथ को उसके सिर के नीचे रखना चाहिए। इससे मरीज की उल्टी बाहर निकल जाएगी
- इसी पोजिशन में मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं
ये न करें
- मरीज को होश में लाने के लिए पानी, जूस आदि न दें
- उसे तकिया बिल्कुल न लगाएं
- 108 पर फोन करें और नजदीकी अस्पताल ले जाएं
- मरीज के आसपास शोर न करें, वरना उसके दिमाग पर जोर पड़ेगा