फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंच मिला तो निखर गई सुरों की प्रतिभा

Sun, 18 Sep 2016 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
ऑडिशन में भाग लेता कलाकार । - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
सुर को लेकर कंठ पर भरोसा करने वाला हर टैलेंट शनिवार को शाहपुर में मौजूद रैंपस स्कूल की ओर मुखातिब था। ये लोग जब अमर उजाला की ओर से आयोजित सुपर टैलेंट ऑडिशन के मंच पर पहुंचे तो माहौल देख उनके कंठ से सुर फूट पड़े। सबने अपनी प्रतिभा से जजों के पैनल को प्रभावित करने की हर संभव कोशिश की। छह घंटे तक चले ऑडिशन की सफलता इसी से आंकी जा सकती है कि इसमें गोरखपुर और बस्ती मंडल के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन


ऑडिशन में हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागी सुबह नौ बजे से ही पहुंचने लगे। 11 बजे के करीब शुरू हुआ ऑडिशन देर शाम तक चला। जजों के पैनल में मौजूद डॉ. शरद मणि त्रिपाठी, मिथिलेश तिवारी और राकेश चंद्र श्रीवास्तव ने बड़ी ही बारीकी से हर प्रतिभागी की क्षमता को तलाश कर अंक दिए। 40 फीसदी महिलाओं की मौजूदगी वाले प्रतिभागियों ने गायन की हर विधा का प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सूफी गीतों की संजीदगी थी तो भड़कीले भोजपुरी गीतों का तड़का भी। ऑडिशन का रिजल्ट हफ्ते भर बाद घोषित किया जाएगा। प्रतिभागियों को इसकी जानकारी उनके मोबाइल नंबर पर मैसेज के जरिए दी जाएगी। विजेता प्रतिभागी को ऑडिशन के अगले राउंड में जाने की जानकारी भी मोबाइल पर मैसेज या कॉल से ही दी जाएगी। 

प्रतिभागियों से बातचीत
अवसर पाकर उत्साहित हूं
पिछड़े क्षेत्र में रहने वाले युवाओं की प्रतिभा दब कर रह जाती है। यदि ऐसे अवसर मिलते रहें, तो उनकी प्रतिभा सामने आएगी। आयोजन का परिणाम ही है कि मुझे भी अवसर मिल सका है।
विज्ञापन

- सत्यप्रकाश सिंह, महराजगंज

पहली बार दिया ऑडिशन
यूं तो जहां भी गाना गाने का अवसर मिलता है, उसे नहीं छोड़ता। प्रतिभा को आंकने के लिए बने ऑडिशन मंच पर गायकी के हुनर का प्रदर्शन करने का मौका पहली बार मिला है, आभारी हूं। 
- अजय त्रिपाठी, पीपीगंज

ऑडिशन मंच ने बढ़ाया उत्साह
पिछड़े इलाकों में चाह कर भी अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर नहीं मिलता। गाती तो बहुत दिन से हूं लेकिन उसका आकलन पहली बार हुआ है। इस मंच ने उत्साह बढ़ाया है।
- एकता द्विवेदी, संतकबीरनगर

आत्मविश्वास बढ़ाने वाला आयोजन
जानकारी पाकर ऑडिशन में हिस्सा लेने आई हूं। पर इसका यह मकसद कतई नहीं कि सफलता नहीं मिलने पर निराशा होगी। सफल रहूं या असफल, आत्मविश्वास तो बढ़ेगा ही। 
- जूही, गोरखपुर

अभिभावकों से बातचीत
टैलेंट का निखारने वाला आयोजन
अमर उजाला के इस आयोजन में दूर-दराज से प्रतिभागी आए हैं। यह सुबूत है इस बात का कि लोगों को ऐसे अवसर की तलाश है। मैं भी अपने बेटे के लिए इसी अवसर की तलाश में आया हूं। निश्चित तौर यह टैलेंट निखारने वाला आयोजन है।
- विनय पांडेय, गोरखपुर

जीतने नहीं सीखने आया है बेटा
बेटे को गाने का शौक है। टीवी के ऐसे कार्यक्रमों को बहुत ध्यान से देखता है और शामिल होने के ख्वाब संजोता है। अमर उजाला के आयोजन का पता चला तो उसे यहां लेकर आई हूं। पहला अवसर है इसलिए वह जीतने नहीं बल्कि सीखने आया है।
- किरण जायसवाल, नौतनवां

जजों से बातचीत 
संगीत के लिए सार्थक प्रयास 
अमर उजाला ने पिछले इलाकों से संगीत का टैलेंट ढूंढ निकालने का जो प्रयास किया है, वह नि:संदेह संगीत की सेवा का सार्थक प्रयास है। प्रतिभागियों का उत्साह इस बात का प्रमाण है। ऑडिशन और कार्यशाला जैसे कार्य होते रहने चाहिए।
- मिथिलेश तिवारी

मंच पाने की दिखी ललक
प्रतिभागियों की तादाद इस बात की गवाह थी कि पूर्वांचल के रग-रग में संगीत है, जरूरत है मंच देकर निखारने की। ऐसे उत्साही संगीत प्रेमियों को अवसर देकर अमर उजाला निश्चित ही संगीत की सेवा कर रहा है। सभी में मंच की ललक दिखी।
- डॉ. शरद मणि त्रिपाठी
 
घरों से निकली सुरों की प्रतिभा
प्रतिभाएं पूर्वांचल के घर-घर में हैं लेकिन प्लेटफॉर्म न मिलने के चलते वह दबी रह जाती है। ‘अमर उजाला’ ने घरों की ऐसी प्रतिभाओं को बाहर निकालने की पहल की है, जो बेहद सराहनीय है। प्रतिभागियों का उत्साह और उल्लास इस बात की गवाही थी।
विज्ञापन

- राकेश चंद्र श्रीवास्तव
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें