बाल विकास सेवा पुष्टाहार विभाग में हाईकोर्ट का आदेश भी बेमानी हो गया है। पांच साल पूर्व लगभग तीन सौ आंगनबाड़ी एवं सहायिकाओं का चयन शहर की मलिन बस्ती केंद्रों के संचालन के लिए किया गया था। कुछ लोगों ने चयन पर आपत्ति की तो मामला न्यायालय पहुंचा।
न्यायालय ने चयन को सही ठहराया। शासन ने न्याय विभाग से राय मांगी तो उसने भी हरी झंडी दे दी। निदेशक बाल विकास तक मामला पहुंचा तो उन्होंने भी कोई आपत्ति नहीं की। न्यायालय के आदेश के डेढ़ साल बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिलने पर याचिका दाखिल करने वाली महिला ने डीएम से शिकायत की।
बता दें कि महानगर की मलिन बस्तियों में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 2011 में आवेदन मांगा था, जिसमें 142 आंगनबाड़ी और 147 सहायिकाओं की नियुक्ति होनी थी। चयन के लिए कमिश्नर के निर्देश पर जिलाधिकारी ने तीन पीसीएस अधिकारियों का पैनल बनाया था।
पूरी चयन प्रक्रिया अधिकारियों की देखरेख में पूरी की गई। चयन के बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ। इसकी शिकायत कुछ लोगों ने निदेशक बाल विकास से की। उन्होंने पूरी पत्रावली को तलब कर जांच कराई, जिसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
फिर भी कुछ लोगों ने इसकी शिकायत शासन में कर दी। शासन स्तर से जांच हुई जिसमें कहीं कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी नियुक्ति पत्र जारी करने के बजाय नए सिरे से नियुक्ति करने के लिए आवेदन मांग लिए। अपने स्तर से चयन भी शुरू करा दिया जिस पर न्यायालय ने उस पर रोक लगा दी।
शासन स्तर से प्रयास के बाद जब नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ तो सितारा देवी नामक महिला ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने नियुक्ति को सही ठहराते हुए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया। उस आदेश के बाद भी बाल विकास एवं सेवा पुष्टाहार विभाग की तरफ से शासन से निर्देश मांगा गया।
जिसमें निदेशक आनंद कुमार सिंह ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि उच्च न्यायालय के पारित आदेश 21-5-2015 का अनुपालन करने में कोई बाधा नहीं है। वहीं विशेष सचिव अरुण कुमार मिश्र ने निदेशक बाल विकास को भेजे पत्र में कहा है कि सितारा देवी के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कोई विधिक बाधा नहीं है। इस सबके बाद भी विभाग ने नियुक्ति पत्र नहीं जारी किया जाना अपने आप में सवाल है।
इसकी पत्रावली प्रक्रिया में है। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में है। मुख्य विकास अधिकारी ने डीजीसी से राय मांगी है। राय आने के बाद इसका जल्द ही निस्तारण कर दिया जाएगा।
हेमंत सिंह जिला कार्यक्रम अधिकारी